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    कोडक के कैमरों ने कैसे दूसरे विश्वयुद्ध में निभाई थी अहम भूमिका, रातोंरात क्यों मार्केट से गायब हुई कंपनी

    Updated: Sat, 12 Apr 2025 04:22 PM (IST)

    कोडक कैमरे को बनाने वाली कंपनी की शुरुआत साल 1880 में कोडक कंपनी के नाम से हुई थी। कैमरे के मार्केट में आने पर ईस्टमैन ने नारा दिया था आप बटन दबाइए बाकी हम करेंगे। फिर साल 1975 में इसी कंपनी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर स्टीवन सैसन ने एक डिजिटल कैमरे का आविष्कार किया। 1940 के दशक में 35mm इस कैमरे का इस्तेमाल फिल्मों में काफी ज्यादा किया जाता था।

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    कैसे हुआ कोडक कंपनी का अंत (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 80-90 का दशक चल रहा हो और किसी की शादी हो रही है या फिर किसी के जन्मदिन की पार्टी, इन सब समारोह में एक चीज कॉमन दिखती थी, वो था कोडक का कैमरा। उस दौर में कोडक कैमरा लोगों के हाथों में आसानी से दिख जाता था और लोग अपने खास पलों को कोडक के कैमरे में क्लिक करके समेट लेते थे।

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    लेकिन, एक आज का दौर है जब कोडक कंपनी बाजार से लगभग गायब हो चुकी है और शायद ही अब कोई कोडक के कैमरों का इस्तेमाल करता होगा। विश्व को पहला डिजिटल कैमरा देने वाली कंपनी खुद को डिजिटल वर्ल्ड में ढाल नहीं पाई और इसे अंत का सामना करना पड़ा।

    क्या है कोडक कैमरा?

    • कोडक कैमरे को बनाने वाली कंपनी की शुरुआत साल 1880 में कोडक कंपनी के नाम से हुई थी।
    • इस कैमरे को पूरी दुनिया के सामने साल 1888 में जॉर्ज ईस्टमैन ने पेश किया था।
    • उस वक्त ये कैमरा काफी महंगा हुआ करता था।
    • यह एक ऐसा कैमरा था जिसमें एक पेपर फिल्म के जरिए एक साथ सौ फोटो खींची जाती थी।
    • कैमरे के मार्केट में आने पर ईस्टमैन ने नारा दिया था 'आप बटन दबाइए, बाकी हम करेंगे'।
    • हालांकि कैमरा पेश करने के कुछ ही दिनों बात ईस्टमैन ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया था।

    दूसरे विश्वयुद्ध में कोडक कैमरे ने कैसे निभाई थी अहम भूमिका?

    बता दें, 1940 के दशक में 35mm इस कैमरे का इस्तेमाल फिल्मों में काफी ज्यादा किया जाता था। इसके अलावा दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कई पत्रकारों ने कोडक कैमरे की मदद से फोटो खींचकर युद्ध की तस्वीर दुनिया तक पहुंचाई थी.

    डिजिटल कैमरे के रूप में हुई पहचान

    • 19वीं सदी में इस कैमरे की कीमत काफी ज्यादा होने की वजह से यह बहुत कम लोगों तक ही पहुंच पाया था।
    • फिर साल 1975 में इसी कंपनी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर स्टीवन सैसन ने एक डिजिटल कैमरे का आविष्कार किया।
    • ये कैमरा जॉर्ज ईस्टमैन के पेश किए गए कैमरे से काफी अलग था।
    • इस कैमरे में पेपर फिल्म का इस्तेमाल नहीं किया जाता था। बल्कि इस कैमरे द्वारा खींची गई तस्वीरों को कैसेट्स में सेव किया जाता था, जिसे बाद में टीवी पर देखा जा सकता था।
    • इस कैमरे को आम तौर पर पहले डिजिटल स्टैन स्नैपर के रूप में पहचाना जाता था।
    • इसमें Charge Coupled Device (CCD) इमेज सेंसर का भी इस्तेमाल किया गया था।
    • यह कैमरा वजन में करीब चार किलोग्राम का था और ब्लैक एंड व्हाइट फोटो खींची जाती थी।
    • इस कैमरे का रिजोल्यूशन 0.01 मेगा पिक्सेल था। बाद में कंपनी ने 1986 में 1.4 मेगा पिक्सल का कैमरा सेंसर बनाया था।
    • 1975 में पहली डिजिटल तस्वीर को रिकॉर्ड करने में इस कैमरा को 23 सेकंड का समय लगा था।

    वक्त के साथ क्यों नहीं बदल पाई कोडक?

    वक्त के साथ खुद को बदलना बहुत जरूरी होती है। लेकिन कोडक खुद को समय के साथ बदल नहीं पाई और बदलाव को ठुकराने की वजह से कंपनी धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी से गायब होती चली गई।

    वक्त के साथ डिजिटल कैमरे का चलन बढ़ने के साथ ही मार्केट डिमांड बढ़ने पर कई कंपनियां कोडक को टक्कर देने के लिए बाजार में उतर गई। कोडक को ये लगा कि डिजिटल कैमरे को और बढ़ावा देने पर कंपनी को रील और प्रिंटिंग शीट का निर्माण करने वाली कंपनियों को बंद करना पड़ेगा।

    नीति में परिवर्तन नहीं करना, थी सबसे बड़ी भूल

    उस दौरान कोडक ने अपनी नीति में परिवर्तन न करके इसके प्रचार प्रसार में जोर लगाया, जो कंपनी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। कंपनी प्रचार प्रसार में पैसे गंवा रही थी। दूसरी तरफ अन्य कंपनियां डिजिटल कैमरे बेचकर पैसे कमा रही थी। हालांकि, कोडक ने बाद में डिजिटल कैमरे बनाना शुरू किया, लेकिन तब तक वो मार्केट में अन्य कंपनियों से काफी पीछे जा चुकी थी।

    कोडक कंपनी का कैसे हुआ अंत?

    कंपनी हर साल काफी ज्यादा नुकसान झेलती रही और यही कारण है कि कंपनी ने 2004 में काफी नुकसान झेलने के बाद पारंपरिक फिल्म कैमरे बनाना बंद कर दिया। वहीं साल 2011 तक अमेरिकी शेयर बाजार में कंपनी के शेयर कंपनी के इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।