नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। अमेरिका समेत भारत में भी इन दिनों कमला हैरिस काफी चर्चा में हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका 2020 में होने वाले अमेरिका के राष्‍ट्रपति चुनाव में उनका संभावित प्रत्‍याशी बनना है। हालांकि इसको लेकर उन्‍होंने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन इसके बावजूद ऐसा होने की संभावना जोरों पर है। बहरहाल, हम आपको बता दें कि कमला हैरिस भारतीय मूल की है, इस लिहाज से उनकी चर्चा भारत में भी हो रही है। क्रिसमस के बाद वह चुनाव लड़ने पर अंतिम फैसला ले लेंगी। भारतीयों के लिए यह काफी गर्व की बात हो सकती है कि करीब 61 वर्ष पहले जो सफर दलीप सिंह सौंध ने शुरू किया था वह अब काफी आगे निकल चुका है। सौंध ऐसे पहले भारतीय थे जो अमेरिकी संसद में निर्वाचित हुए थे। इतना ही नहीं वह तीन बार इसके सदस्‍य रहे। उनका यह रिकॉर्ड 2017 में पेशे से डॉक्‍टर रहे ऐमी बेरा ने तोड़ा था।

सीनेट की सदस्य बनने वाली पहली भारतवंशी महिला

भारतीय मूल की सांसद कमला हैरिस अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट की सदस्य बनने वाली पहली भारतवंशी महिला भी हैं। उनका जन्‍म कैलिफोर्निया के ऑकलैंड में हुआ था। वह 2011 से 2017 तक कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल भी रह चुकी हैं। 1990 से 1998 तक वह कैलिफोर्निया की डिस्ट्रिक्‍ट अटार्नी भी रहीं। इस दौरान उनका कार्यकाल काफी शानदार रहा। जहां तक कमला की बात है तो वह भारत में बसी अपनी जड़ों के काफी करीब रही हैं। वह अपने दादा पीवी गोपालन के काफी करीब रही हैं। उनके दादा इंडियन डिप्‍लोमेट रहे चुके हैं। इसके अलावा बचपन में उनकी छुट्टियां चेन्‍नई में बसंत नगर के घर में ही गुजरती थीं। लेकिन बाद में समय ओर काम की व्‍यस्‍तता के चलते इसमें कुछ कमी जरूर आई।

जीवन का उतार चढ़ाव

उनकी मां श्‍यामला गोपालन जहां भारतीय हैं वहीं पिता डोनाल्‍ड हैरिस जमैका मूल के हैं। उनकी मां वर्ष 1960 में चेन्‍नई से अमेरिका चली गई थीं और वहीं बस गईं। हैरिस महज सात वर्ष की थीं जब हैरिस की मां और पिता का तलाक हो गया था। कानूनी लड़ाई के बाद हैरिस की जिम्‍मेदारी मां को मिली। इसके बाद उनकी मां हैरिस को लेकर कनाडा चली गई थीं। यहां पर रहकर ही श्‍यामला ने स्‍तर कैंसर में शोध पूरा किया। उनके पिता अमेरिका में अर्थशास्‍त्र के प्रोफेसर थे। हैरिस की हमेशा से यह चाहत रही कि वह ऐसी जगह और पद तक पहुंचे जहां पर लोगों के लिए नियम और कानून बनाए जाते हैं। कैलिफार्निया का डिस्ट्रिक्‍ट अटार्नी रहते हुए उन्‍होंने ऐसे लोगों के लिए दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए कार्यक्रम चलाया जो नशीले पदार्थों की तस्‍करी से जुड़े थे। इसमें उन्‍हें कामयाबी भी मिली और आठ वर्षों के दौरान करीब 300 लोग ग्रेजुएट भी हुए।

सर्वे में पांचवां स्‍थान

उनके राष्‍ट्रपति चुनाव में उतरने को लेकर जो कयास लगाए जा रहे हैं उसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी है कि आगामी राष्‍ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देने के लिए डेमोक्रेटिक वोटरों के बीच जब पसंदीदा उम्मीदवार को लेकर सर्वे किया गया तो उसमें वह पांचवें स्‍थान पर रहीं। इस सर्वे में पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन का पहले नंबर पर थे। इसके बाद दूसरे नंबर पर वरमोंट के सीनेटर बर्नी सैंडर्स, तीसरे पर टेक्सास के रिपब्ल्किन सांसद बीटो ओरुर्क और चौथे नंबर पर मैसाच्युसेट्स की सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन का नाम था।

‘फीमेल ओबामा’ नाम से रहीं चर्चित

बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान हैरिस ‘फीमेल ओबामा’ नाम से खूब चर्चित रहीं। उन्हें ओबामा का करीबी माना जाता था। ओबामा ने राष्ट्रपति पद पर रहते विभिन्न चुनावों में हैरिस की तारीफ की थी। वह 2016 में डेमोक्रेट प्रत्याशी के तौर पर सीनेट के लिए चुनी गई थीं। यहां पर आपको ये भी बता देना जरूरी होगा कि अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पांच नाम ऐसे हैं जिन्‍होंने यहां का सदस्‍य बनकर अपने साथ भारत का भी नाम रोशन किया हे। इनमें कमला हैरिस के अलावा अमी बेरा, रोहित खन्ना, प्रमिला जयपाल और राज कृष्णमूर्ति का नाम शामिल है। यह भी काफी दिलचस्‍प है कि यह सभी सांसद डेमोक्रेटिक पार्टी से ही ताल्‍लुक रखते हैं। अमरीका में भारतीयों की महज एक फीसद आबादी को देखते हुए यह आंकड़ा काफी अच्‍छा कहा जा सकता है। भारतीय मूल की महिला सांसदों में तुलसी गबार्ड का नाम भी शामिल है जो अमेरिका में पहली हिंदु महिला सांसद बनी थीं।

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Posted By: Kamal Verma

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