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    अमेरिकी संसद में हिंसा पर पूर्व रक्षामंत्री ने दी गवाही, कहा- सेना जल्द भेजने से हो सकता था तख्तापलट का भ्रम

    By Monika MinalEdited By:
    Updated: Wed, 12 May 2021 04:38 PM (IST)

    जनवरी में अमेरिकी संसद हिंसा मामले में पूर्व रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर ने अपनी सफाई दी और कहा है कि वे यह मानते हैं कि सेना का किसी भी कार्रवाई में बहुत ही कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए। वह एकदम सेना का इस्तेमाल प्रशासनिक स्तर पर उचित नहीं मानते हैं।

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    अमेरिकी संसद में हिंसा पर पूर्व रक्षामंत्री की गवाही

    वाशिंगटन, एपी। अमेरिका में चुनावों के बाद संसद (कैपिटल हिल) में हिंसा की घटना में प्रशासनिक स्तर पर लिए गए सभी निर्णयों की जिम्मेदारी तत्कालीन कार्यवाहक रक्षा मंत्री क्रिस्टोफर मिलर ने अपने ऊपर ली है। उन्होंने देरी से सेना के पहुंचने पर सफाई दी है कि पहले से सेना भेजने पर समर्थकों में तख्तापलट का भ्रम हो सकता था। ऐसे में मामला और गंभीर हो जाता।

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    इस संबंध में संसद की ओवर साइट कमेटी के सामने पेश होकर अपने सभी निर्णयों के बारे में तत्कालीन कार्यवाहक रक्षा मंत्री मिलर ने दलील दी। संसद की कमेटी को दिए पूर्व लिखित बयान में मिलर ने कहा है कि वे यह मानते हैं कि सेना का किसी भी कार्रवाई में बहुत ही कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए। वह एकदम सेना का इस्तेमाल प्रशासनिक स्तर पर उचित नहीं मानते हैं। पूर्व में हुई घटनाओं के कारण वह उन गलतियों को नहीं दोहराना चाहते थे।

    मिलर ने इस बात से भी इनकार किया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का घटना के समय रक्षा मंत्रालय में कोई दखल था। सुनवाई करने वाली कमेटी की अध्यक्ष कैरोलिन मैलोनी ने कहा कि हमारी सुनवाई में पहली बार अमेरिकी जनता को ट्रंप कार्यकाल के शीर्ष अधिकारियों से यह जानकारी मिल सकेगी कि संसद पर हमले में इतनी लापरवाही क्यों और किस कारण हुई।

    बता दें कि कैपिटल हिंसा मामले में जांच चल रही है।इसमें सवाल उठ रहा है कि इतनी व्यापक हिंसा के मामले में तत्काल नियंत्रण की कोशिशों में कहां कमी रह गई। इस साल छह जनवरी को ट्रंंप समर्थकों ने अमेरिकी संसद पर हमला बोल दिया था। इस क्रम में संसद में राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल करने वाले जो बाइडन के अप्रूवल की कार्यवाही चल रही थी। इस उपद्रव में पांच लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर अपने समर्थकों को उकसाने का आरोप लगा था, जिसके कारण यह घटना हुई। ट्रंप पर इसके लिए महाभियोग भी चलाया गया जिससे बाद में वे बरी हो गए थेे।