नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। यूक्रेन के राष्ट्रपति से बातचीत के मसले पर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने की हरी झंडी दे दी है। ट्रंप ने महाभियोग प्रक्रिया को राष्ट्रपति का उत्पीड़न बताते हुए मजाक करार दिया है। ऐसे में आइये जानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर महाभियोग कैसे लगता है?, क्यों लगता है और इसका मतलब क्या है?

क्या है महाभियोग?

महाभियोग एक ऐसा प्रावधान है, जो कांग्रेस (अमेरिकी संसद) को अमेरिकी राष्ट्रपति को हटाने की अनुमति देता है। अमेरिकी संविधान के तहत, प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) में बहुमत के बाद महाभियोग चलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। महाभियोग तब लाया जाता है जब देशद्रोह, घूस या फिर किसी बड़े अपराध में शामिल होने का शक है।

संख्या बल की स्थिति

प्रतिनिधि सभा में अभी डेमोक्रेटिक पार्टी के 235 सदस्य हैं और रिपब्लिकन पार्टी के 199 सदस्य हैं और एक निर्दलीय है। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप पर हमला कर सकती है। वहीं सीनेट में रिपब्लिकन 53 और डेमोक्रेटिक के 45 सदस्य हैं और दो निर्दलीय हैं, जो आमतौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ वोट करते हैं। राष्ट्रपति को दोषी सिद्ध करने के लिए 67 मतों की आवश्यकता होगी, जो तब तक नहीं हो सकता जब तक कि कुछ रिपब्लिकन राष्ट्रपति के खिलाफ मतदान करें।

महाभियोग का इतिहास

अमेरिका के इतिहास में कई बार महाभियोग का बादल गहराया है, लेकिन केवल दो राष्ट्रपतियों को ही इसका सामना करना पड़ा। 1968 में राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन पर महाभियोग चलाया गया था, लेकिन सीनेट ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया। वहीं 1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने है।

कौन हैं नैंसी पेलोसी?

नैंसी पेलोसी अमेरिका के कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद हैं। वह इस साल जनवरी में अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर चुनी गई। अमेरिका में राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के बाद वह तीसरी सबसे ताकतवर राजनीतिक शख्सियत हैं। अमेरिका में पिछले साल के अंत में संसद के लिए मध्यावधि चुनाव हुए, जिसके बाद निचले सदन यानी कि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत में आ गई और नैंसी स्पीकर बनीं।

क्या है प्रक्रिया?

अगर किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग लाया जाता है तो संसद की न्यायिक समिति इन आरोपों की जांच करती है। फिर रजामंदी होने पर आरोप तय किए जाते हैं। इन आरोपों पर प्रतिनिधि सभा में वोटिंग होती है। अगर वोटिंग महाभियोग के पक्ष में होती है तो फिर मामला सीनेट को सौंप दिया जाता है। फिर सीनेट कोर्ट की तरह काम करती है और अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश इसकी अध्यक्षता करते हैं। सुनवाई के लिए सीनेटर्स के बीच से कुछ सांसदों को चुना जाता है, जो कि मैनेजर के रूप में जाने जाते हैं। ये मैनेजर्स अभियोजकों की भूमिका निभाते हैं। इस ट्रायल के दौरान राष्ट्रपति के वकील अपना पक्ष रखते हैं। सुनवाई पूरी होने के बाद सीनेट महाभियोग के हर आर्टिकल पर वोट करती है। यदि वोटिंग में कम से कम दो तिहाई सीनेटर राष्ट्रपति को दोषी पाते हैं तो उन्हें हटा दिया जाता है।

पहली बार नहीं

2016 में हुए राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए रूस के साथ ट्रंप की मिलीभगत के आरोपों के बाद उन पर महाभियोग चलाने की बात हुई थी। इसके अलावा डेमोक्रेटिक कांग्रेस की चार महिला सांसदों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी करने पर भी उनके खिलाफ महाभियोग की मांग उठी थी। हालांकि, यह अलग बात है कि इन मामलों में ट्रंप पर महाभियोग नहीं चलाया जा सका और वह पद पर बने रहे।

यह भी पढ़ें:

‘मैं पाकिस्तान की मदद कर सकता हूं, लेकिन तभी जब नरेंद्र मोदी भी तैयार हों’- डोनाल्ड ट्रंप

Posted By: Sanjay Pokhriyal

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस