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    कौन है शाहजहां? जिसके गुर्गों ने ED के अधिकारियों को पीटा; अब TMC दे रही है सफाई

    Updated: Fri, 05 Jan 2024 11:41 PM (IST)

    बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस के नेता के घर छापेमारी करने गए ईडी अधिकारियों व केंद्रीय बलों के जवानों पर शुक्रवार को हुए हमले की घटना का बचाव करते हुए राज्य में सत्तारूढ़ दल ने इसके लिए केंद्रीय एजेंसी को ही जिम्मेदार ठहराया है। शाहजहां शेख बंगाल के पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक बेहद करीबी माना जाता है।

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    हमले में घायल ईडी अधिकारी से हाल चाल जानते राज्यपाल। (फोटो- एएनआई)

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस के नेता के घर छापेमारी करने गए ईडी अधिकारियों व केंद्रीय बलों के जवानों पर शुक्रवार को हुए हमले की घटना का बचाव करते हुए राज्य में सत्तारूढ़ दल ने इसके लिए केंद्रीय एजेंसी को ही जिम्मेदार ठहराया है।

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    टीएमसी के मंत्री ने केंद्र पर साधा निशाना

    घटना को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए तृणमूल की वरिष्ठ नेता व राज्य सरकार में मंत्री डा शशि पांजा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने जिस तरह हालात पैदा किए और स्थानीय लोगों को उकसाया, उसकी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई।

    घटना पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पांजा ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र व भाजपा के इशारे पर केंद्रीय एजेंसियां जिस तरह से तृणमूल नेताओं को लगातार परेशान कर रही है, उसके प्रतिवाद में लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया।

    पांजा ने कहा, ईडी अधिकारियों पर हमले की घटना को केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने संघीय ढांचे पर हमले की बात कही। राज्य का बकाया रोकना सही मायनों में संघीय ढांचे पर हमला है। उन्होंने राज्य सरकार व तृणमूल को बदनाम करने के लिए इस घटना के पीछे भाजपा की साजिश की आशंका भी जताई।

    यह भी पढ़ेंः 'बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने जैसी स्थिति', ED की टीम पर हमले के बाद माकपा-कांग्रेस ने ममता बनर्जी को घेरा

    कुणाल घोष ने की भाजपा और कांग्रेस की आलोचना 

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा और कांग्रेस की आलोचना करते हुए दावा किया कि बंगाल में कानून व्यवस्था कई अन्य राज्यों से कहीं बेहतर है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल पूरे प्रकरण पर निष्पक्ष तरीके से विचार करने के बजाय सीधे नतीजे निकाल रहे हैं। उन्हें भाजपा नेता की तरह काम नहीं करना चाहिए।

    बता दें कि यह घटना सुबह तब हुई जब ईडी अधिकारियों ने राशन वितरण घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां शेख के आवास पर छापेमारी करने पहुंचीं, जहां उन्हें शाहजहां के समर्थकों के हमलों का सामना करना पड़ा। समर्थकों ने ईडी अधिकारियों और केंद्रीय बलों के जवानों पर हमले के साथ उनके वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद यहां का सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा के साथ कांग्रेस ने भी राज्य में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।

    ज्योतिप्रिय मल्लिक का हाथ पकड़कर तृणमूल में आया था शाहजहां

    तृणमूल कांग्रेस के जिस नेता को लेकर ईडी, केंद्रीय बल के जवानों व मीडियाकर्मियों पर हमला हुआ, वह शाहजहां शेख बंगाल के पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का हाथ पकड़कर तृणमूल में आया था और मल्लिक का बेहद करीबी माना जाता है। मल्लिक राशन वितरण घोटाले में गिरफ्तार होकर वर्तमान में जेल में बंद हैं।

    शाहजहां का राजनीति में पदार्पण हालांकि वाममोर्चा के शासनकाल में हुआ था। उसके मामा मोसलेम शेख उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली इलाके में माकपा के कद्दावर नेता व पंचायत प्रधान थे। मामा की शह पर शाहजहां ने मछली पालन केंद्र खोला था। उससे पहले वह संदेशखाली-सरबेरिया रूट पर चलने वाले ट्रेकर पर चढ़ने वाले यात्रियों के टिकट की जांच करता था। संदेशखाली के सभी मछली पालन केंद्रों पर मामा-भांजे का नियंत्रण था। बंगाल में सत्ता परिवहन की लहर चलने के साथ ही शाहजहां ने माकपा से दूरी बनानी शुरू कर दी थी।

    2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 2013 में वह भी ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल हो गया। मामा ने उस वक्त माकपा का साथ नहीं छोड़ा था और सरबेरिया पंचायत पर भी उनका कब्जा कायम था। मोसलेम ने अपना जो गुट तैयार किया था, शाहजहां ने उसमें दरार पैदा कर दी। बाध्य होकर मामा को भांजे की पार्टी में शामिल होना पड़ गया।

    शाहजहां वर्तमान में तृणमूल के संदेशखाली-1 ब्लॉक का अध्यक्ष है। स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि शाहजहां वाममोर्चा के शासनकाल में बाहुबल से मछली पालन केंद्रों को अपने नियंत्रण में रखता था और तृणमूल के शासनकाल में प्रशानिक क्षमता से। शाहजहां सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रहता है इसलिए अपने इलाके में काफी लोकप्रिय है।

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