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    West Bengal: शिक्षक भर्ती घोटाले के खिलाफ आंदोलन रोकने का अपनाया ये कैसा तरीका? प्रदर्शनकारियों को ही दे डाली नौकरी

    Updated: Wed, 12 Jun 2024 11:45 PM (IST)

    बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के खिलाफ आंदोलन रोकने के लिए कुछ प्रदर्शनकारियों को नौकरी दे दी है जिससे बवाल मच गया है। यह नियुक्ति कक्षा नौ से 12 तक के लिए की गई थी। इनकी नियुक्ति की अनुशंसा राज्य शिक्षा विभाग से ही आई थी। ईडी का दावा है कि एसएससी की सलाहकार समिति के पूर्व चेयरमैन शांतिप्रसाद सिन्हा और बिचौलिए प्रसन्ना राय के खिलाफ कई सुबूत मिले हैं।

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    शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से चल रहा है आंदोलन (Image: File)

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। आंदोलन को रोकने के लिए कुछ आंदोलनकारियों को स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा शिक्षक के रूप में नियुक्त कर दिया गया था। यह नियुक्ति कक्षा नौ से 12 तक के लिए की गई थी। इनकी नियुक्ति की अनुशंसा राज्य शिक्षा विभाग से ही आई थी। ईडी ने अदालत में सौंपे दस्तावेजों में यह दावा किया है।

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    ईडी का दावा है कि एसएससी की सलाहकार समिति के पूर्व चेयरमैन शांतिप्रसाद सिन्हा और बिचौलिए प्रसन्ना राय के खिलाफ कई सुबूत मिले हैं। उस जांच के आधार पर जांचकर्ताओं ने शिक्षा विभाग के अधिकारी समरजीत आचार्य का बयान लिया।

    183 नामों की सिफारिश, ED का बड़ा आरोप

    बयान के मुताबिक नौवीं और दसवीं कक्षा के शिक्षकों के लिए भर्ती पैनल की समाप्ति के बाद 183 नामों की सिफारिश की गई थी। ईडी ने दावा किया कि इनमें से ज्यादातर के नामों की सिफारिश गैरकानूनी तरीके से की गई थी। सिफारिश शांतिप्रसाद के माध्यम से बिचौलिए प्रदीप सिंह उर्फ छोटू की तरफ से आई थी। ईडी ने दावा किया कि समरजीत ने ही वह सिफारिश पत्र प्रिंट किया था। उनके बयान के मुताबिक 183 लोगों में से तीन की नौकरी की सिफारिशें शिक्षा विभाग से आईं। वह एसएससी में अवैध भर्ती के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

    प्रदर्शनकारियों को ही दे डाली नौकरी

    ईडी का दावा है कि इसी तरह 11वीं-12वीं कक्षा में भर्ती के लिए पैनल की अवधि समाप्त होने के बाद 39 व्यक्तियों के नामों की अवैध रूप से सिफारिश की गई थी। इस मामले में भी समरजीत ने अनुशंसा पत्र छपवाया था। नौवीं-दसवीं की नियुक्ति की तरह इस मामले में भी शांतिप्रसाद के माध्यम से प्रदीप की तरफ सिफारिश आई थी। उन 39 में से नौ नामों की सिफारिश राज्य शिक्षा विभाग ने की थी। ईडी ने दावा किया कि वो नौ लोग असल में प्रदर्शनकारी थे।

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