राज्य ब्यूरो, कोलकाता : बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता बिमान बनर्जी लगातार तीसरी बार विधानसभा का स्पीकर (अध्यक्ष) शनिवार को चुने गए। चुनाव में जीत के बाद तृणमूल ने पहले ही उन्हें अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी थी। विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए शनिवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था, जिसका चुनाव नतीजों के बाद से जारी हिंसा के चलते भाजपा विधायकों ने अध्यक्ष के चुनाव का बहिष्कार किया, जिसकी वजह से बनर्जी लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुने गए। गौरतलब है कि 2011 में बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही बनर्जी विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इधर, सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, तापस राय, शशि पांजा समेत तृणमूल के अन्य विधायकों बीरबाहा हांसदा, श्यामल मंडल और गुलशन मलिक ने विमान बनर्जी के नाम का प्रस्ताव किया, जिसका सभी सदस्यों ने समर्थन किया।

इसके बाद औपचारिक तौर पर उनके अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की गई। इस दौरान सदन में विपक्ष के एक भी विधायक उपस्थित नहीं थे। इससे पहले गुरुवार और शुक्रवार को प्रोटेम स्पीकर और पूर्व मंत्री व वरिष्ठ तृणमूल नेता सुब्रत मुखर्जी ने नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा सदस्यता की शपथ दिलाई थी। इधर, बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद से जारी राजनीतिक हिंसा के चलते प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने एक दिन पहले ही कह दिया था कि पार्टी के विधायक विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव का बहिष्कार करेंगे।  

विधानसभा के बहिष्कार को लेकर ममता ने भाजपा पर साधा निशाना

इधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है, इसीलिए विधानसभा का बहिष्कार कर रही है। वहीं, पूर्ववर्ती सरकार में शिक्षा व संसदीय कार्य मंत्री एवं वरिष्ठ तृणमूल नेता पार्थ चटर्जी ने कहा कि नवनियुक्त अध्यक्ष का स्वागत है। उन्होंने जिस तरह से संविधान पर विश्वास रखते हुए पूर्व में सदन की कार्यवाही संचालित की है वह गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि बनर्जी के तीसरी बार अध्यक्ष बनने के बाद उम्मीद है कि सभी सदस्य अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं बखूबी रखने में सक्षम होंगे। बता दें कि विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है 213 सीटों पर कब्जा जमाया है। भाजपा 77 सीटें जीतकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है जबकि कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन का सफाया हो गया।

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