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बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की कोई जानकारी नहीं, सत्यापन के बाद होगी कार्रवाई; विधानसभा में बोले सीएम सुवेंदु

Published: Fri, 15 May 2026 09:36 PM (IST)

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में चुनाव बाद हिंसा के आरोपों पर कहा कि सरकार के पास ...और पढ़ें

बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की कोई जानकारी नहीं- सीएम सुवेंदु (फाइल फोटो)

बंगाल में चुनाव बाद हिंसा की कोई जानकारी नहीं- सीएम सुवेंदु (फाइल फोटो)

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने चुनाव बाद हिंसा की जानकारी से इनकार किया

  2. सत्यापन के बाद ही हिंसा के मामलों पर होगी कार्रवाई

  3. सदन में सकारात्मक विपक्ष की भूमिका पर जोर दिया

राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता । बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि विपक्षी तृणमूल कांग्रेस द्वारा चुनाव बाद हिंसा के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके बारे में सरकार के पास कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसे आरोपों के सही तरीके से सत्यापन के बाद ही कार्रवाई होगी।

सुवेंदु राज्य में नई भाजपा सरकार के गठन के बाद अध्यक्ष (स्पीकर) पद के चुनाव के लिए बुलाए गए विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा चुनाव बाद हुई हिंसा के लगाए गए आरोपों का जवाब दे रहे थे। नवगठित विधानसभा के पहले सत्र की कार्यवाही के दौरान चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्यभर में हिंसा के कारण कई लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा।

वरिष्ठ तृणमूल विधायक ने सदन में कहा कि कई जगहों पर हिंसा हो रही है। बहुत से लोग बेघर हो गए हैं। चुनाव के बाद राज्य के लोगों के बीच भय का माहौल बना हुआ है और भरोसे की भावना कमजोर हुई है। सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

इसके जवाब में सुवेंदु ने कहा कि हमें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। अगर कोई बेघर हुआ तो पुलिस और प्रशासन उनकी वापसी कराएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंसा में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी वास्तविक मामलों में कानून अपना काम करेगा।

भाजपा विधायकों ने सदन में लगाए चोर-चोर के नारे, तृणमूल ने किया सदन से वाकआउट

सदन में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब भाजपा विधायकों ने तृणमूल के आरोपों के बाद इसका जोरदार विरोध करते हुए चोर- चोर के नारे लगाए। जिसके बाद विपक्षी तृणमूल के विधायकों ने कुछ देर के लिए सदन से वाकआउट कर दिया। तृणमूल के सदस्य विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के दौरान भी सदन से अनुपस्थित रहे, हालांकि बाद में वापस लौट आए। भाजपा के पहली बार के विधायक रथींद्र बोस निर्विरोध रूप से बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

'हम सकारात्मक विपक्ष चाहते हैं, विधानसभा टकराव की जगह नहीं

विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद नवगठित 18वीं बंगाल विधानसभा को संबोधित करते हुए सुवेंदु ने कहा कि यह सदन जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और संवैधानिक सिद्धांतों तथा स्थापित नियमों के अनुसार काम करेगा।

सदन में मजबूत और सकारात्मक विपक्ष की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हम सकारात्मक विपक्ष चाहते हैं। विधानसभा टकराव की जगह नहीं है। संवैधानिक दृष्टि से यह सदन विपक्ष का है। हम संविधान को ध्यान में रखकर विधानसभा की कार्यवाही को आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बोलने का समय 50-50 के आधार पर होगा। यानी भले भाजपा के मुकाबले मुख्य विपक्षी तृणमूल के सदस्यों की संख्या बहुत कम है, बावजूद हम चाहते हैं कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त अवसर मिले।

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार नहीं चाहती कि किसी भी विधायक को निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़े और सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। सुवेंदु ने उल्लेख किया कि 2021 से लेकर हाल तक जब वे विपक्ष के नेता थे तो उन्हें पांच बार निलंबित कर दिया गया था और करीब 11 माह सदन से बाहर रहे। सुवेंदु ने कहा कि बावजूद इसके हम नहीं चाहते कि मौजूदा विपक्ष के साथ ऐसा हो।

सदन में रचनात्मक भूमिका निभाएंगे : नौशाद सिद्दीकी

वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ से इंडियन सेक्युलर फ्र ंट (आइएसएफ) के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि पिछले चुनाव के बाद हुई हिंसा ने लोगों में भय पैदा किया था और उस समय विपक्ष की आवाज को दबा दिया गया था।

उन्होंने सरकार से अपील की कि विपक्षी दलों को सदन में सम्मान दिया जाए और जनता के मुद्दे उठाने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे सदन में रचनात्मक भूमिका निभाएंगे, न कि महज विरोध की राजनीति करेंगे।

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