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सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन सौंपने के लिए सुवेंदु सरकार की त्रिपक्षीय रणनीति

Published: Fri, 15 May 2026 09:28 PM (IST)

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी सरकार ने बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपने की त्रिपक्षीय ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाढ़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि सौंपने की त्रिपक्षीय रणनीति अपनाई है। राज्य सचिवालय में भूमि हस्तांतरण रणनीति से अवगत सूत्रों ने बताया कि योजना का पहला हिस्सा यह है कि बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित सरकारी भूमि तुरंत बीएसएफ को उपलब्ध कराई जाए, ताकि कांटेदार बाड़ लगाने का पहला चरण तुरंत शुरू हो सके।

रणनीति का दूसरा हिस्सा यह है कि मौजूदा बाजार मूल्य से अधिक उचित पारिश्रमिक का भुगतान करके सीमा के निकट स्थित निजी भूमि को भूस्वामियों से अधिग्रहित किया जाए और बाद में उस भूमि को बीएसएफ को सौंप दिया जाए ताकि दूसरे चरण की शुरुआत की जा सके। भूमि हस्तांतरण में तीसरी रणनीति के तहत बिना बाड़ वाली सीमाओं के निकट अतिक्रमित भूमि पर कब्जा करना और फिर उस भूमि को बीएसएफ को सौंपना शामिल होगा, जो इस प्रक्रिया को पूरा करेगा।

सूत्रों ने बताया कि भूमि हस्तांतरण रणनीति के पहले चरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और रणनीति के अनुसार प्रत्येक चरण के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की गई है। पूरी प्रक्रिया मंत्रिमंडल द्वारा इस संबंध में लिए गए निर्णय की तारीख से 45 दिनों की अंतिम समय सीमा के भीतर निश्चित रूप से पूरी हो जाएगी। बंगाल की पूर्व मुख्य सचिव नदिनी चक्रवर्ती को विकास कार्यों के लिए प्रधान समन्वयक के रूप में पूरी प्रक्रिया की देखरेख करने और बीएसएफ को भूमि का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है।

बंगाल विधानसभा चुनाव के हाल ही में संपन्न होने से पहले जारी भाजपा के संकल्प पत्र (चुनाव घोषणापत्र) के प्रमुख वादों में से एक यह था कि बिना बाड़ वाली सीमाओं पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को भूमि सौंपी जाए, जो पिछली तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की अनिच्छा के कारण लंबे समय से लंबित मुद्दा था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव से पहले राज्य में रैलियों के दौरान यह भी वादा किया था कि बीएसएफ को जमीन सौंपने का निर्णय राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लिया जाने वाला पहला निर्णय होगा।