गृह मंत्रालय का बंगाल सरकार को निर्देश, कहा- जन्म और मृत्यु के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए अपनाए केंद्र की पद्धति
WB News गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए केन्द्र सरकार के पोर्टल का इस्तेमाल किया जाए। फिलहाल बंगाल इस पंजीकरण के लिए अपने पोर्टल का इस्तेमाल करता है।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार को जन्म-मृत्यु के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए अपनी पद्धति के बदले केंद्र की पद्धति का अनुसरण करने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय है कि 2014 में जन्म-मृत्यु के पंजीकरण के लिए केंद्र ने जो पोर्टल शुरू किया था, उससे अब तक 23 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश जुड़ चुके हैं।
केन्द्र सरकार के पोर्टल से नहीं जुड़ा बंगाल
केन्द्रीय सरकार की ओर से शुरू किए गए जन्म-मृत्यु के पंजीकरण पोर्टल से जुड़े राज्यों की सूची में बंगाल का नाम नहीं है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अभी केंद्र की विभिन्न योजनाओं के तहत सरकारी अनुदान पाने के लिए लोगों को अपने बैंक खाते का विवरण देना पड़ता है। इससे सरकारी सुविधाएं सीधे उन तक पहुंचती है। फर्जी व एक नाम से कई लोगों की उपस्थिति को टालने के लिए केंद्र अपने पोर्टल का पूर्ण रूप से व्यवहार बाध्यतामूलक कर सकता है।
पहले भी राज्य सरकार को दिए गए कई निर्देश
बंगाल के इसमें शामिल नहीं होने पर अनुदान के क्षेत्र में जटिलता पैदा हो सकती है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार को पहले ही आधार कार्ड पर आधारित जन्म-मृत्यु पंजीकरण की पद्धति शुरू करने को कहा गया था।
राज्य सरकार ने अब तक उस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। अब गृह मंत्रालय ने जन्म-मृत्यु के पंजीकरण कराने के लिए अपने पोर्टल का इस्तेमाल करने को कहा है। पहले भी सीएम ममता ने केंद्र के कई निर्देश को मानने से इनकार कर दिया है। अब देखना है कि इसे लेकर उनका क्या रुख रहता है।
एक काम के लिए दो पद्धति से बढ़ सकती है जटिलता
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की ओर से पिछले साल ही जन्म-मृत्यु के पंजीकरण के लिए अपना डेटाबेस तैयार किया गया है, जिसका नगर निकाय, पंचायतों से लेकर निजी अस्पतालों तक में प्रयोग किया जा रहा है। केंद्र का कहना है कि बंगाल सरकार उसकी पद्धति को नहीं अपनाकर खुद से जन्म-मृत्यु का पंजीकरण कर रही है। एक काम के लिए दो पद्धति होने से जटिलता बढ़ रही है। साथ ही, फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के मामले भी बढ़ रहे हैं।
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