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    Sardar Patel Jayanti: राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे सरदार वल्लभ भाई पटेल

    By Babita kashyapEdited By:
    Updated: Sat, 31 Oct 2020 01:01 PM (IST)

    Sardar Patel Jayanti भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय एकता के प्रतिबिंब व हर भारतीय के हृदय में बसने वाले थे।

    लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 145वीं जयंती पर नमन

    सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट ने आज कहा कि आज के मजबूत भारत की नींव उन्होंने ही रखी थी। सरदार पटेल की 145वीं जयंती पर दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा नेता राजू बिष्ट ने अपने संदेश में कहा, "राष्ट्रीय एकता के प्रतिबिंब व हर भारतीय के हृदय में बसने वाले लौह पुरुष सरदार पटेल जी को कोटिश: नमन। आजादी के बाद सैकड़ों रियासतों में बिखरे भारत का एकीकरण कर, उन्होंने आज के मजबूत भारत की नींव रखी। उनका दृढ़ नेतृत्व, राष्ट्र समर्पण व विराट योगदान भारत कभी नहीं भुला सकता।" उन्होंने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। इस दिन को पूरा देश राष्ट्रीय एकता के दिवस में मनाता है। पटेल का जन्म गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर, 1875 को हुआ था। भारत को बनाने में इनकी विशेष भूमिका मानी जाती है। सरदार पटेल को भारत की 565 रियासतों का विलय करके अखंड भारत के निर्माण के लिए याद किया जाता है। आज सरदार पटेल की 145वीं जयंती के मौके पर पढ़िए उनके जीवन से जुड़ सुने किस्से। 

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     आर्थिक तंगी ने अटकाए रोड़े 

    आजकल जिस उम्र में बच्चे गेजुएट हो जाते हैं उस उम्र में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 10वीं की परीक्षा पास की थी। उनकी शिक्षा में सबसे ज्यादा रोड़े परिवार की आर्थिक तंगी ने अटकाए। इसके बावजूद उन्होंने ज़िलाधिकारी की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए। वर्ष 1905 में वल्लभ भाई पटेल वकालत की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे। लेकिन पोस्टमैन ने उनका पासपोर्ट और टिकट उनके भाई विठ्ठल भाई पटेल को सौंप दिया। दोनों भाइयों का नाम वी जे पटेल था। वल्लभ भाई पटेल ने बड़े भाई को अपना पासपोर्ट और टिकट दे दिया।

      जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय 

    सरदार पटेल वकालत पढ़ने के लिए इंग्लैंड गए वह भी 36 साल की उम्र में। शुरुआत में देर से पढ़ाई शुरू करने वाले सरदार पटेल ने 36 महीने के वकालत के कोर्स को महज़ 30 महीने में ही पूरा कर दिया। वर्ष 1947 में भारत को आजादी तो मिली लेकिन बिखरी हुई। देश में कुल 562 रियासतें थीं। अपनी कूटनीतिक क्षमता के बल पर पटेल ने इन्हें भारत में मिला लिया। इनमें जूनागढ़ रियासत के नवाब ने 1947 में पाकिस्तान के साथ जाने का फ़ैसला किया था। इसके बाद पटेल ने जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय करा लिया। 

     पत्‍नी की मौत की खबर पढ़ भी जारी रखी जिरह 

    सरदार पटेल 12 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ पहुंचे। उन्होंने भारतीय सेना को इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के निर्देश दिए। कोर्ट में बहस चल रही थी। सरदार पटेल अपने मुवक्किल के लिए जिरह कर रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने कागज़ में लिखकर उन्हें संदेश देता है। संदेश पढ़कर पटेल उस कागज को अपनी कोट की जेब में रख लेते हैं। उन्होंने जिरह जारी रखी और मुक़दमा जीत गए। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उस कागज पर उनकी पत्नी झावेर बा की मृत्यु की खबर थी। जब अदालती कार्यवाही समाप्त हुई तब उन्होंने अपनी पत्नी की मृत्यु की सूचना सबको दी।