जागरण संवाददाता, कोलकाता : साहित्य अकादमी ने इस वर्ष के युवा पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। मैथिली भाषा के लिए इस बार कोलकाता में रहने वाले युवा लेखक रूपेश त्योंथ को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार 2022 के लिए चुना गया है। मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के त्योंथा गांव के रहने वाले रूपेश मैथिली साहित्य में नवकृष्ण ऐहिक नाम से व्यंग्य लिखते आ रहे हैं। उनके मैथिली व्यंग्य संग्रह खुरचनभाइक कछमच्छी के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। उनका मूल नाम रूपेश कुमार झा है।

33 वर्षीय रूपेश पिछले करीब दो दशक से कोलकाता में ही रह रहे हैं और यहां एक आइटी प्रोफेशनल के रूप में काम करते हैं। साहित्य में गहरी रूचि रखने वाले रूपेश करीब डेढ़ दशक से स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा यानी मैट्रिक तक की पढ़ाई गांव में ही हुई है और उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता आ गए थे। तब से कोलकाता ही इनकी कर्मभूमि है। इनकी मैथिली भाषा में कविता संग्रह एक मिसिया 2013 में और व्यंग्य संग्रह खुरचनभाइक कछमच्छी 2015 में प्रकाशित हुआ था।

इनके व्यंग्य नाटक कनफुसकी का भी सफलतापूर्वक मंचन हो चुका है। रूपेश प्रतिष्ठित आनलाइन पत्रिका मिथिमीडिया का संपादन और संचालन भी कर रहे हैं। रूपेश को इससे पहले लेखन के लिए नवहस्ताक्षर पुरस्कार, सीसीआरटी जूनियर फैलोशिप अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष विभिन्न भाषाओं के 23 लेखकों की कृतियों को वर्ष 2022 के साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के लिए चुना गया है। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा चंद्रशेखर कम्बार की अध्यक्षता में कार्यकारी मंडल की बैठक में इसका निर्णय लिया गया। इसके बाद अकादमी के सचिव डा के श्रीनिवास राव ने इसकी घोषणा की। इस वर्ष हिंदी में इस पुरस्कार के लिए भगवंत अनमोल के उपन्यास प्रमेय को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।

Edited By: Vijay Kumar