रिलेशनशिप की समस्याएं बनीं युवाओं की सबसे बड़ी मानसिक चुनौती, हैरान कर देंगे ये आंकड़े
आज के समय में कम उम्र के लोग भी तमाम प्रकार की मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। रिश्तों में दरार के कारण लोग बीमार हुए जा रहे हैं। इस बीच सामने आई एक रिपोर्ट ने सभी को हैरान कर दिया है। भारत में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की बहुमुखी प्रकृति को उजागर करते हैं। माना जा रहा है कि अब रिलेशनशिप की समस्याएं सबसे बड़ी मानसिक चुनौती बनी हैं।
विशाल श्रेष्ठ, जागरण, कोलकाता। चिंता, घबराहट, अवसाद, तनाव एक समय मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां हुआ करती थीं, लेकिन अब इनकी जगह रिलेशनशिप की समस्याओं ने ले ली हैं। देश के पांच प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और पुणे के आंकड़े ये चिंताजनक आंकड़े पेश कर रहे हैं।
आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट की इकाई एमपावर मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन, जो मानसिक समस्याओं का समाधान पेश करती है। इन पांच शहरों से आए एक लाख से अधिक काल में सर्वाधिक 33 प्रतिशत लोगों ने रिलेशनशिप की समस्याओं से परेशान होने की बात कही है।
इसके अलावा 23 प्रतिशत ने चिंता व घबराहट, 20 प्रतिशत ने अवसाद, 16 प्रतिशत ने तनाव व आठ प्रतिशत ने विभिन्न मानसिक विकारों को अपनी परेशानी का सबब बताया है। काल करने वालों में 60 प्रतिशत पुरूष व 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें 18-40 आयु वर्ग के लोगों की संख्या सबसे अधिक (74 प्रतिशत) है।
'सिटी ऑफ ज्वाय' सबसे ज्यादा परेशान
कोलकाता को 'सिटी ऑफ ज्वाय' यानी आनंद नगरी के नाम से जाना जाता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यहां के लोग आपसी संबंधों को लेकर सबसे अधिक (45 प्रतिशत) परेशान हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (38 प्रतिशत) दूसरे व देश की वाणिज्यिक राजधानी मुंबई (34 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर है। पुणे (32 प्रतिशत) व बेंगलुरू (27 प्रतिशत) इस मामले में चौथे व पांचवें नंबर पर हैं, हालांकि चिंता व घबराहट जैसी मानसिक समस्याओं के मामले में ये दोनों शहर संयुक्त रूप से अव्वल (26 प्रतिशत) हैं।
इसके बाद कोलकाता (24 प्रतिशत), मुंबई (23 प्रतिशत) व दिल्ली (22 प्रतिशत) का स्थान है। वहीं मुंबई के लोग सबसे अधिक (21 प्रतिशत) अवसादग्रस्त हैं। बेंगलुरु व पुणे (20 प्रतिशत) संयुक्त रूप से दूसरे व दिल्ली (18 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर है। कोलकाता 17 प्रतिशत के साथ सबसे निचले पायदान पर है। आंकड़ों के मुताबिक मुंबई, दिल्ली व बेंगलुरु में 26-40 आयु वर्ग, पुणे में 25-40 आयु वर्ग और कोलकाता में 18-25 आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
इसलिए होती जा रही ऐसी विकट स्थिति
- वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक व एमपावर हेल्पलाइन की प्रमुख रीमा भांडेकर ने कहा कि ये आंकड़े भारत में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की बहुमुखी प्रकृति को उजागर करते हैं। प्रत्येक शहर अपने सामाजिक व सांस्कृतिक वातावरण से प्रभावित अद्वितीय तनावों को दर्शाता है। इनमें हस्तक्षेप करना जरुरी है।
- मनोचिकित्सक व एमपावर के कोलकाता सेंटर की प्रमुख डॉ. प्रीति पारीख कहती हैं कि कोलकाता के लोगों, विशेषकर 18-25 आयु वर्ग के युवाओं के बीच रिलेशनशिप की समस्याओं का बढऩा गंभीर चिंता का विषय है।
- दरअसल ये लोग जटिल सामाजिक व भावनात्मक परिस्थितियों से जूझ रहे हैं। पहचान बनाने, करियर निर्माण और स्वस्थ संबंध स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ये चुनौतियां उनके मानसिक स्वास्थ्य और समग्र विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं इसलिए आरंभिक हस्तक्षेप और उचित सहायता तंत्र बेहद जरुरी है।'
- मनोविज्ञानी अभिषेक हंस ने कहा कि आपसी रिश्ते बिगड़ने की एक बड़ी वजह यह है कि आज के दौर में कोई किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहता। सब अपने हिसाब से जीना चाहते हैं। लोगों में सहनशीलता भी कम होती जा रही है।
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