बंगाल: अस्पताल से छुट्टी मिलते ही मां ने नवजात को दिया 'दान', स्टांप पेपर पर लिखकर दंपती को सौंपा पुत्र
महिला द्वारा हस्ताक्षरित 100 रुपये के स्टांप पेपर में लिखा है कि मेरे पास बच्चे के भरण-भोषण की वित्तीय क्षमता नहीं है। बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेने में अक्षम हूं। इसलिए मैं लिखकर बच्चा दे रही हूं। बच्चा सिर्फ आठ दिन का है। पिछले तीन दिनों से बच्चा चटर्जी बागान इलाके के रहने वाले यादव के घर पर हैं।

राज्य ब्यूरो, कोलकाताः अस्पताल से छुट्टी मिलते ही एक मां ने अपने नवजात शिशु को एक निःसंतान दंपती को 'दान' में दे दिया। महिला ने स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर किए और बच्चे को एक निःसंतान दंपती को दे दिया। हालांकि, बच्चे को 'गोद' लेने वाले दंपती ने दावा किया कि यहां कोई वित्तीय लेनदेन नहीं हुआ है। यह घटना शनिवरा हुगली जिले के चुंचुरा थाना क्षेत्र के चटर्जी बागान इलाके में सामने आई है।
नवजात को किया दान
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 22 सितंबर को चुंचुरा जिला अस्पताल में ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाली महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। यह ईंट भट्ठा सुगंधा क्षेत्र में स्थित है। हालांकि, 27 सितंबर को महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उसने नवजात पुत्र संतान को लेकर अस्पताल से बाहर निकली और अपना बच्चा चुंचुरा के ही चटर्जीबागान इलाके के रहने वाले यादव व बुलू मंडल नामक दंपती को दान में दे दिया।
भरण-भोषण की वित्तीय क्षमता नहीं
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, महिला द्वारा हस्ताक्षरित 100 रुपये के स्टांप पेपर में लिखा है कि मेरे पास बच्चे के भरण-भोषण की वित्तीय क्षमता नहीं है। बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी लेने में अक्षम हूं। इसलिए मैं लिखकर बच्चा दे रही हूं। बच्चा सिर्फ आठ दिन का है। पिछले तीन दिनों से बच्चा चटर्जी बागान इलाके के रहने वाले यादव के घर पर हैं।
प्रक्रिया में रुपये का लेन-देन नहीं
बुलू ने बताया कि स्तनपान करने वाले बच्चे को जब मां के दूध की जरूरत होती है तो उसे बाहरी दूध दिया जा रहा है। मंडल दंपती ने दावा किया कि उन्होंने कानून के मुताबिक बच्चे को गोद लिया है। यादव का कहना है कि कोर्ट स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। हमने लिखित में बच्चे को स्वीकार किया है। इसलिए यह ट्रांसफर वैध है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रक्रिया में एक रुपये का लेन-देन नहीं हुआ।
मजिस्ट्रेट से संपर्क करने की सलाह
यह खबर मिलने के बाद कोडालिया-2 ग्राम पंचायत के उप मुखिया देबाशीष चक्रवर्ती शनिवार को मंडल के घर गए। वह समझाने लगा कि बच्चा गोद लेने का यह तरीका गैरकानूनी है। बच्चे को गोद लेने को नियंत्रित करने वाले कई सरकारी नियम हैं। उन्होंने यादव को उप-विभागीय मजिस्ट्रेट से संपर्क करने की सलाह दी।
दूसरी ओर, आठ दिन के बच्चे ने बुलू के चेहरे पर मुस्कान ला दिया है। इसलिए यादव बच्चे को किसी भी हालत में खोना नहीं चाहता। दूसरी ओर, जन्म देने वाली मां से संपर्क की कोशिश की गई लेकिन संभव नहीं हो सका।
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