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    Sandeshkhali पहुंचे सुवेंदु अधिकारी, कल हाईकोर्ट ने दी थी दौरा करने की मंजूरी

    Updated: Tue, 20 Feb 2024 12:11 PM (IST)

    भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी संदेशखाली में यौन शोषण व अत्याचार की शिकार महिलाओं और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर जमीनी हालात का जायजा लेंगे। मालूम हो कि सुवेंदु ने पिछले सप्ताह दूसरी बार संदेशखाली जाने से पुलिस द्वारा रोके जाने पर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने सोमवार को उनकी याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें सुरक्षाकर्मियों के साथ संदेशखाली जाने की सशर्त अनुमति दे दी।

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    भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी संदेशखाली के लिए रवाना हुए।(फोटो सोर्स: भाजपा फेसबुक पेज)

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा सशर्त अनुमति मिलने के बाद बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता व भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी मंगलवार सुबह उत्तर 24 परगना जिले के अशांत संदेशखाली पहुंचे। सुवेंदु के साथ विधायक अग्निमित्रा पाल समेत कुछ अन्य भाजपा नेता भी गए हैं।

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     हालांकि, उन्हें और अन्य नेताओं को पुलिस ने संदेशखाली जाने से रोक दिया था, लेकिन कुछ घंटों के बाद उन्हें संदेशखाली जाने की इजाजत मिल गई है। हाई कोर्ट का कहना है कि वे संदेशखाली जा सकते हैं लेकिन सीआरपीसी की धारा 144 के कारण वे किसी भी पार्टी कार्यकर्ता या समर्थक को अपने साथ नहीं ले जा सकते।

    ममता सरकार कोर्ट का निर्देश भी नहीं मान रही: भाजपा नेता 

    पुलिस ने सुवेंदु को धामाखाली में रोक दिया। सुवेंदु का कहना है कि ममता सरकार हाई कोर्ट का निर्देश भी नहीं मान रही है। वहीं राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की एकल पीठ के निर्देश को चुनौती देते हुए खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है।

    सुवेंदु यौन शोषण व अत्याचार की शिकार महिलाओं और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए संदेशखाली जाने वाले थे। इसके अलावा भाजपा ने संदेशखाली कांड की एनआइए जांच की मांग की है। 

    सुवेंदु ने ठकठकाया हाईकोर्ट का दरवाजा

    सुबह करीब नौ बजे कड़ी सुरक्षा में ये सभी कोलकाता से रवाना हुए। सुवेंदु संदेशखाली में यौन शोषण व अत्याचार की शिकार महिलाओं और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर जमीनी हालात का जायजा लेंगे। मालूम हो कि सुवेंदु ने पिछले सप्ताह दूसरी बार संदेशखाली जाने से पुलिस द्वारा रोके जाने पर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    भाजपा नेता संदेशखाली दौरे में कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे: कोर्ट

    अदालत ने सोमवार को उनकी याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें सुरक्षाकर्मियों के साथ संदेशखाली जाने की सशर्त अनुमति दे दी। अदालत ने साथ ही हिदायत दी कि भाजपा नेता संदेशखाली दौरे में कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे। संदेशखाली में रहने के दौरान उन्हें किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होने का भी निर्देश दिया गया है।

    हाई कोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत संदेशखाली में लागू निषेधाज्ञा को भी निलंबित कर दिया। अदालत ने 13 फरवरी को इसे अमान्य कर दिया था लेकिन राज्य के अधिकारियों को गड़बड़ी वाले विशिष्ट क्षेत्रों के लिए ऐसे उपायों की बहाली का अनुरोध करने का अवसर दिया था। अदालत के फैसले के बावजूद जिला प्रशासन ने 14 फरवरी को संदेशखाली के कुछ निर्दिष्ट क्षेत्रों में आवाजाही पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया था।

    शाहजहां शेख की गिरफ्तारी को लेकर महिलाओं ने किया मार्च 

    उल्लेखनीय है कि पिछले कई दिनों से पूरे देश में चर्चा के केंद्र में रहे संदेशखाली में हाल में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के फरार नेता शाहजहां शेख और उनके करीबियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया था। महिलाओं का आरोप है कि शाहजहां और उनके समर्थकों ने उनका यौन उत्पीड़न किया और जबरन जमीन पर भी कब्जा कर लिया है।

    महिला आयोग की अध्यक्ष ने राष्ट्रपति शासन की मांग की

    एक दिन पहले सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी संदेशखाली का दौरा किया था। संदेशखाली दौरे के बाद रेखा शर्मा ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति शासन के बिना यहां पर महिलाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफे की भी मांग की थी। साथ ही कहा कि ममता बनर्जी को एक महिला के नाते संदेशखाली जाना चाहिए तभी उन्हें वहां की स्थिति दिखाई देगी। अगर वे मुख्यमंत्री बनकर वहां जाएंगी तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।

    यह भी पढ़ें: Sandeshkhali Case: क्या बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन? संदेशखाली दौरे के बाद महिला आयोग अध्यक्ष ने दिया बड़ा बयान