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राष्ट्र सेवा में असाधारण कार्यों के लिए बीएसएफ डीआइजी गुलेरिया को तीसरी बार मिला राष्ट्रपति पुलिस पदक

गुलेरिया ने बीएसएफ में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट 1987 में ज्वाइन किया था। उन्होंने बीएसएफ में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इन्होंने कश्मीर तथा जम्मू में आतंकवाद के शुरुआती दौर में ड्यूटी की है तथा पंजाब राजस्थान तथा बंगाल बॉर्डर पर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

By PRITI JHAEdited By: Published: Wed, 27 Jan 2021 04:42 PM (IST)Updated: Wed, 27 Jan 2021 04:42 PM (IST)
राष्ट्र सेवा में असाधारण कार्यों के लिए बीएसएफ डीआइजी गुलेरिया को तीसरी बार मिला राष्ट्रपति पुलिस पदक
सीमा सुरक्षा बल के डीआइजी सुरजीत सिंह गुलेरिया।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। राष्ट्र के लिए सेवा के दौरान असाधारण कार्यों व वीरता के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर मुख्यालय, कोलकाता के डीआइजी व प्रवक्ता सुरजीत सिंह गुलेरिया को 72वें गणतंत्र दिवस पर देश के राष्ट्रपति द्वारा  राष्ट्रपति पुलिस मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया है। बीएसएफ की ओर से बताया गया कि यह तीसरी बार है जब गुलेरिया को असाधारण व विशिष्ट सेवा के लिए 'राष्ट्रपति पुलिस पदकÓ मिला है। मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा तहसील अंतर्गत खैरिया गांव के रहने वाले गुलेरिया को इससे पहले उत्कृष्ठ सेवा कार्यों के लिए 2008 में प्रेसिडेंट पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियल सर्विस एवं 2016 में प्रेसिडेंट पुलिस मेडल फॉर डिस्टिंग्विश सर्विस, मिल चुके हैं। उन्हेंं प्रशिक्षण, ऑपरेशन तथा आपदा प्रबंधन में बेहतरीन कार्यों के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के कई प्रशस्ति पत्र भी मिल चुके हैं।

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गुलेरिया ने बीएसएफ में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट 1987 में ज्वाइन किया था। उन्होंने बीएसएफ में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। कश्मीर तथा जम्मू में आतंकवाद के शुरुआती दौर में उन्होंने ड्यूटी की है तथा पंजाब, राजस्थान तथा बंगाल बॉर्डर पर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गुलेरिया ने बंगाल बॉर्डर पर पशु तस्करी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। वह अपनी इमानदारी व कुशल प्रशासक के तौर पर बीएसएफ में जाने जाते हैं। इधर, उनको तीसरी बार राष्ट्रपति पुलिस पदक मिलने पर दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के महानिरीक्षक (आइजी) अश्विनी कुमार सिंह सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे फ्रंटियर के लिए गौरव का क्षण बताया है। बताया गया कि गुलेरिया ने संयुक्त राष्ट्र (युनाइटेड नेशन) की पुलिस में भी कोसबो में डेपुटेशन पर एक वर्ष की सेवा दे चुके हैं। गुलेरिया को एनडीआरएफ की कोलकाता बटालियन तथा पटना बटालियन को स्थापित करने का भी श्रेय प्राप्त है। उन्होंने विभिन्न आपदाओं में एनडीआरएफ की तरफ से भाग लिया है। 

2017 में जैश के आतंकियों से गुलेरिया ने लिया था लोहा

बताया गया कि 23 अक्टूबर 2017 को खूंखार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों ने श्रीनगर एयरपोर्ट के पास गोगोलैंड स्थित बीएसएफ कैंपस पर रात 3.45 बजे फिदाईन हमला कर दिया था। आतंकियों ने कैंपस की दीवार फांद कर कैंपस में स्थित एडमिन ब्लॉक, अधीनस्थ अधिकारी मेस तथा अधिकारी मेस में घुसने का प्रयास किया। इस प्रयास में आतंकी एडमिन ब्लॉक व अधीनस्थ अधिकारी मेस में घुसने में कामयाब हो गए तथा एक आतंकी ड्यूटी पर तैनात सीमा प्रहरी की गोलियों का शिकार हो गया। इसके बाद आतंकियों ने रात को ग्रेनेडों तथा गोलियों से कैंपस में अंधाधुंध फायरिंग की। आतंकियों के फिदाईन हमले को पुरजोर जवाब देने के लिए उस समय कश्मीर फ्रंटियर में डीआइजी (जी) सुरजीत सिंह गुलेरिया ने डीआइजी हरिलाल के साथ मिलकर अपने जवानों के साथ कैंपस में मौजूद आतंकियों से लोहा लेते हुए उन्हें मार गिराया था। इस ऑपरेशन में एक अधीनस्थ अधिकारी वीर गति को प्राप्त हुए थे तथा दो जवान घायल हुए थे। 

हिमाचल में अपने गांव में ही हुई है गुलेरिया की प्रारंभिक शिक्षा, बेस्ट एथलीट भी रह चुके हैं 

गुलेरिया मूलत: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा तहसील अंतर्गत खैरिया गांव के निवासी हैं। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल खैरिया तथा हरिपुर में प्राप्त करने के बाद डीएवी कॉलेज कांगड़ा से बीएससी तथा गर्वंमेंट कॉलेज धर्मशाला से बीएड की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बीएसएफ में सेवा देते हुए एमबीए (आपदा प्रबंधन) की डिग्री भी हासिल की। कॉलेज टाइम में गुलेरिया अपने कॉलेज (डीएवी, कांगड़ा) के बेस्ट एथलीट भी रहे हैं। इसके अलावा शॉटपुट तथा डिस्कस थ्रो में वह हिमाचल यूनिवर्सिटी, शिमला के तीन साल तक चैंपियन रहे हैं।


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