कोलकाता, राज्य ब्यूरो। तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता शुभेंदु अधिकारी के बाद अब विधायक वैशाली डालमिया ने भी पार्टी छोड़ने का संकेत दिया है। वैशाली की बाली विधानसभा क्षेत्र में वहां के 16 पूर्व तृणमूल पार्षदों को लेकर तृणमूल के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बैठक बुलाई थी, जिसमें स्थानीय विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया था।

वैशाली ने इन पूर्व पार्षदों को 'गुंडा' बताते हुए उनपर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि ऐसे लोग अगर पार्टी में शामिल रहेंगे तो उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ेगी। वैशाली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की पुत्री हैं।

इससे पहले वैशाली ने खुद को 'बाहरी' कहे जाने पर अपनी ही पार्टी के एक वर्ग की आलोचना करते हुए कहा था कि वे तो प्रधानमंत्री को भी बाहरी व्यक्ति कहते हैं। वे नहीं जानते कि प्रधानमंत्री हमारे परिवार के प्रमुख हैं। जब कोई दूसरे राज्य से आता है तो उसे बाहरी व्यक्ति कहा जाता है। कोई स्वीकार ही नहीं करना चाहता कि भारत एक देश है। जब प्रधानमंत्री को बाहरी व्यक्ति कहा जा रहा है, तो वह कोई अपवाद नहीं हैं। वह एक सामान्य इंसान है।

बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसमभा चुनाव से पहले वैशाली के इस आक्रामक तेवर से राजनीतिक गलियारों में अफवाहों का बाजार गरम हो गया है। कुछ दिन पहले बाली के पूर्व पार्षद तफजील अहमद ने वैशाली को बाहरी बताते हुए और उनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया था। तब वैशाली ने भी जवाबी वीडियो पोस्ट किया था।

कुछ दिन पहले बाली क्षेत्र के बादामतल्ला चौराहे पर पोस्टर लगाए गए थे। उनमें मुख्यमंत्री व तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को संबोधित करके लिखा गया था कि अगले विधानसभा चुनाव में बाली से किसी बाहरी को नहीं, बल्कि स्थानीय को उम्मीदवार बनाया जाए। इसे किसने लगाया, यह किसी को पता नहीं है, लेकिन इसने बाली क्षेत्र में तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच के कलह को फिर से उजागर कर दिया है। वैशाली ने इसपर कहा कि वह बाहरी नहीं हैं। बाली क्षेत्र में उनका घर और संपत्ति हैं। 

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