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    Medical Studies: स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की पढ़ाई के पक्ष में नहीं बंगाल के डाक्टरों का एक वर्ग

    By Jagran NewsEdited By: Sonu Gupta
    Updated: Sun, 16 Oct 2022 11:29 PM (IST)

    बंगाल के डाक्टरों का एक वर्ग स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की पढ़ाई के पक्ष में नहीं है। यहां केबड़े सरकारी अस्पताल एसएसकेएम के गैस्ट्रोएंट्रोलाजी डिपार्टमेंट के प्रमुख गोपाल कृष्ण ढाली ने कहा कि चिकित्सा शास्त्र में ऐसे बहुत से शब्द हैं जिनका बांग्ला भाषा में अनुवाद नहीं किया जा सकता।

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    स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की पढ़ाई के पक्ष में नहीं बंगाल के डाक्टरों का एक वर्ग। (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के डाक्टरों का एक वर्ग स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की पढ़ाई के पक्ष में नहीं है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएसकेएम के गैस्ट्रोएंट्रोलाजी डिपार्टमेंट के प्रमुख गोपाल कृष्ण ढाली ने कहा कि चिकित्सा शास्त्र में ऐसे बहुत से शब्द हैं, जिनका बांग्ला भाषा में अनुवाद नहीं किया जा सकता। अनुवाद करने पर अर्थ का अनर्थ हो सकता है और वे विद्यार्थियों की समझ में भी नहीं आएंगे। इससे उन्हें काफी असुविधा हो सकती है।

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    स्थानीय भाषा में हो सकती है परेशानी

    उन्होंने कहा कि इसके अलावा एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद बहुत से छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। उन मामलों में और भी समस्या हो सकती है। वहीं एसोसिएशन आफ हेल्थ सर्विस डाक्टर्स के महासचिव मानस गुमटा ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई की कोई मूल किताब नहीं है। इसके लिए बहुत से रिफरेंस बुक पढने पड़ते हैं इसलिए स्थानीय भाषा में पढ़ाई होने पर काफी परेशानी हो सकती है।

    पहले भी हुई थी कोशिश

    एसएसकेएम अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक दीप्तेंद्र सरकार ने कहा कि इससे पहले भी बंगाल में आंचलिक भाषा में मेडिकल की पढ़ाई की कोशिश की गई थी लेकिन वह पूरी तरह से विफल हो गई थी।

    केंद्र सरकार  उठा रही है कदम

    मालूम हो कि केंद्र सरकार स्थानीय भाषाओं में मेडिकल की पढ़ाई को कदम उठा रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी ने नेशनल मेडिकल कमीशन और विभिन्न मेडिकल कालेजों के साथ हिंदी व स्थानीय भाषाओं में मेडिकल का पाठ्यक्रम तैयार करने को लेकर बातचीत शुरू की है।

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