सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। Liquor News: बात बन गई तो पीने वालों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी। सरकारी राशन दुकान में दाल और चावल के साथ शराब भी मिलेगी। आल इंडिया फेयर प्राइस शाप डीलर फेडरेशन ने शराब बेचने की अनुमति केंद्र व राज्य सरकार से देने की मांग की है।

इतना ही नहीं मुनाफा बढ़ाने के उद्देश्य से राशन डीलरों ने सरकारी दुकान को डिपार्टमेंटल स्टोर में तब्दील करने की मांग की है। इस मांग के बाद अब सिलीगुड़ी के पीने वाले की यह उम्मीद लगाए बैठे हैï कि पड़ोस के सरकारी राशन दुकान से ही अध्धा या पौव्वा उठा लाएंगे।

बीते कोरोना काल में 'मोद आमादेर दिते होबे राशन दुकाने, मोद आमरा पाबो ना केनो राशन दुकाने ' की धुन पर बनाया शार्ट वीडियो काफी वायरल हुआ था। अब आल इंडिया फेयर प्राइस शाप डीलर्स फेडरेशन ने डीलरों को शराब बेचने की अनुमति देने की मांग केंद्र व देश की सभी राज्य सरकारों से की है।

इस मांग को लेकर फेडरेशन की ओर से केंद्रीय खाद्य व आपूर्ति मंत्रालय के सचिव, केंद्रीय विळा मंत्रालय, केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय समेत देश के सभी राज्यों के खाद्य व आपूर्ति मंत्री और फूड कमिशन को ज्ञापन भेजा है। फेडरेशन का कहना है कि राशन वितरण प्रणाली मेï मिलने वाला कमिशन काफी कम है। इसके अतिरिक्त कोरोना काल से शुरू हुई प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्त्योदय योजना (पीएसजीकेएवाई) भी बंद होने को है।

ऐसी स्थिति में राशन डीलरों के लिए अपना और परिवार का पेट भरना भी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए राशन डीलरों को शराब बेचने का लाइसेïस देने पर आय का स्त्रोत बढ़ेगा। आल इंडिया फेयर प्राइस शाप डीलर फेडरेशन के महासचिव विश्वभर बसु ने बताया कि सरकारी राशन दुकानदारों को महीने में तीन से पांच हजार रुपया ही बचता है।

महंगाई के इस दौर में इतनी कम रकम में पेट पालना भी मुश्किल हो चला है। उन्होंने आगे बताया डीलरों को प्रति क्विंटल पर 15 रुपया मिलता है। पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने दुआरे राशन योजना लांच किया। इस योजना के तहत 75 रुपया प्रति 1िवंटल के हिसाब से डीलरों को मिलता है। इसके अलावे राशन सामग्री के साथ आने वाली जूट या प्लास्टिक की बोरियों को बेचकर डीलर रोजी-रोटी चला रहे हैैï।

दुआरे राशन योजना में डीलरों को काफी नुकसान हो रहा था। नागरिकों के दरवाजे पर राशन पहुंचाने के लिए अलग से वाहन, वाहन चालक और कर्मचारी का खर्च डीलर के कंधों पर था। इसलिए इस योजना के खिलाफ कलकळाा हाई कोर्ट में फेडरेशन की ओर से मामला किया गया था।

अब अदालत ने राशन डीलरों के पक्ष में फैसला देते हुए दुआरे राशन योजना को अवैध करार दिया है। डीलर अब नागरिकों के द्वार पर राशन नहीï पहुंचाएंगे। बल्कि पुरानी पद्धति के तहत लोगों को सरकारी राशन दुकान पर जाकर सामग्री लेना होगा।

यह भी पढ़ें- Swackh Sarvekshan: छत्तीसगढ़ ने लहराया परचम, जानें बेस्ट परफार्मिंग स्टेट की श्रेणी में कौन सा स्थान हासिल किया

राशन डीलरों का तर्क

डीलरों का कहना है कि अक्टूबर महीने से पीएमजीकेएवाई योजना भी बंद की जा रही है। इससे मिलने वाला अत्यधिक कमीशन और बोरियों को बेचने से होने वाला मुनाफा भी बंद हो जाएगा। एक दुकान और गोदाम का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारियों का खर्च आदि के बाद परिवार का पेट भरने का रुपया भी डीलर की जेब में नहीं बचेगा।

इसलिए सरकारी राशन दुकान को जिंदा रखने के लिए फेडरेशन की ओर से शराब बेचने की अनुमति सरकार से मांगी गई है। इसी शराब ने कोरोना काल मेï पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के राजकोष को भरा था। कोरोना काल में ममता सरकार ने शराब की कीमत में तीस प्रतिशत का इजाफा करने के साथ होम डिलीवरी भी शुरू करवा दी थी। हालांकि कोरोना काल समाप्त होने के बाद कीमत को वापस पुराने स्थान पर लाकर खड़ा किया।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट