सिलीगुड़ी: पांच साल में भी नहीं बन सका बर्द्धमान रोड फ्लाईओवर ब्रिज, नई रूकावट आई सामने
शहर को जाममुक्त करने के लिए 2017 में बर्दवान रोड में फ्लाईओवर बनाने का काम पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से शुरू किया गया था। तब मात्र दो साल में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन आज पांच साल बाद भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।

सिलीगुड़ी, जागरण संवाददाता। शहर को जाममुक्त करने के लिए पांच साल पहले यानी 2017 में बर्दवान रोड में फ्लाईओवर बनाने का काम पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से शुरू किया गया था। तब मात्र दो साल में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इसे बनते हुए पांच साल पूरे हो चुके हैं। फ्लाईओवर तैयार करने का काम महज 70 प्रतिशत ही हो पाया है।
एयरव्यू मोड़ व विशाल मेगा मार्ट क्षेत्र में निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन रेल पुल के करीब पूरा काम ही बाकी पड़ा हुआ है। माटीगाड़ा में बालासन सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद नौकाघाट होते हुए बर्दवान रोड के रास्ते दूरदराज जाने वाले बसों व मालवाही वाहनों द्वारा एकमात्र विकल्प रास्ते के रूप में इसका उपयोग किया जा रहा है। शहरवासियों को उम्मीद थी कि जल्द से जल्द फ्लाईओवर के कार्य पूरे होने से उन्हें जाम की समस्या से राहत मिलेगी, लेकिन इतनी जल्द लोगों को राहत मिलते हुए नहीं दिख रही है।
वहीं अब इस मामले में एक नई समस्या भी उभर कर सामने आ गई है। फ्लाईओवर के रास्ते में लगभग 51 मीटर क्षेत्र में रेल लाइन व उस पर रोड ओवर ब्रिज है। इस पर से होकर वाहन यातायात करते हैं। रास्ते को बाधित किए बिना यहां काम करने की चुनौती है। मिली जानकारी के अनुसार रेलवे ने रेल वाले क्षेत्र में काम बंद करने का निर्देश दिया है। मौखिक तौर पर संबंधित कंपनी का टेंडर रद करने की बात भी कही गई है। टेंडर प्राप्त करने वाले संस्था के कर्णधार अजीत घोष का कहना है कि रेलवे द्वारा कहा जा रहा है कि एस्टिमेट में कुछ त्रुटियां हैं, जिसके चलते काम बंद करने को कहा गया है। वे लोग काम बंद कर चुके हैं। दो सालों से वह इस दिशा में काम कर रहे थे। दो साल बाद इस तरह की बात सुनकर आश्चर्य होता है। निर्माणकारी संस्था के इंजीनियर प्रिंस कुमार महालदार कहते हैं कि 51 मीटर के क्षेत्र में रोड ओवर ब्रिज है। इस पर से ऊपर से होकर बड़े-बड़े मालवाहक गाड़ियां भी चलती हैं। यहां रास्ता काफी ऊंचा है। इसके लिए नौ मीटर का स्लैब काटना होगा। रास्ते को बिना बाधित काम करने के लिए सीट पाइल लगाने की जरूरत है। रेलवे से अनुमोदन मिलने के बाद ही डेढ़ करोड़ रुपए मूल्य के शीट पाइल लाया गया है, लेकिन अचानक से रेल द्वारा काम बंद करने की बात कही गई है।
इस बारे में स्थानीय पार्षद विवेक सिंह का कहना है कि वह नगर निगम के आयुक्त को इस बारे में रेलवे से बातचीत करने के लिए कहेंगे। अगर फ्लाईओवर निर्माण का काम अधर में लटकता है तो काफी मुश्किल होगी। पहले ही इसके निर्माण में काफी विलंब हो चुका है। बताते चलें कि सितंबर 2020 में लगभग 13 करोड़ 92 लाख रूपए का रेलवे के साथ रेल ब्रिज क्षेत्र में निर्माणकारी संस्था का एक समझौता हुआ था। फरवरी महीने में संस्था की ओर से रेल वाले क्षेत्र में काम शुरू किया गया था। जांच परख के बाद यह पाया गया कि यहां पिलर देने के लिए 1200 मीटर लोहा का जाल देना पड़ेगा। टेस्टिंग करने के बाद यहां पिल्लर देने का काम शुरू भी हुआ है, लेकिन काम शुरू होने के तुरंत बाद काम बंद कर दिया गया। जबकि पीडब्ल्यूडी व रेल विभाग ने इसके लिए मिलकर डिजाइन किया था। सीट पाइल का उपयोग करने के लिए कहा गया था। अब कहा जा रहा है कि एस्टिमेट में कुछ कमियां हैं। इससे उनके संस्था को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा। रेलवे विभाग के सीनियर डिविजनल इंजीनियर सतीश ज्योति का कहना है कि पीडब्ल्यूडी विभाग का कुछ कार्य बाकी है। रेल वाले क्षेत्र में क्या दिक्कत हो रही है इस बारे में वह देख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 2017 में पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से ओवर रोड फ्लाईओवर बनाने का निर्णय लिया गया था। एयर व्यू मोड़ से झंकार मोड़ होते हुए विशाल मेगा मार्ट तक इसे बनाने का कार्य शुरू किया गया था। 2017 में इसके लिए 45 करोड़ की राशि मंजूर की गई थी। कूचबिहार की एक एजेंसी को काम करने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन 5 साल बीत चुके हैं अभी भी फ्लाई ओवर का कार्य लगभग 50 प्रतिशत ही हो पाया है।जैसे-जैसे समय गुजरता चला जा रहा है वैसे वैसे इसकी लागत भी बढ़ती चली जा रही है।
फ्लाईओवर क्षेत्र के व्यवसायियों का कहना है कि वह इस इंतजार में है कि जल्द से जल्द फ्लाईओवर का काम समाप्त हो क्योंकि फ्लाईओवर का काम काज चलते रहने के कारण उनके व्यवसाय भी प्रभावित हो रहे हैं। साथ ही जाम की समस्या है सो अलग जितना जल्द काम समाप्त होगा, उतनी ही जल्द उन्हें राहत मिलेगी।
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