SAIL की मेगा विस्तार योजना: 1.20 लाख करोड़ निवेश से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता, घटेंगे कर्मचारी
SAIL अगले चार वर्षों में 1.20 लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश कर अपनी उत्पादन क्षमता 20 मिलियन टन से ...और पढ़ें

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
चार वर्षों में 1.20 लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश।
उत्पादन क्षमता 20 से 35 मिलियन टन करने का लक्ष्य।
2031 तक कर्मचारियों की संख्या 26 हजार होगी।
संवाद सहयोगी, बर्नपुर। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) आने वाले चार वर्षों में अपनी उत्पादन क्षमता और औद्योगिक ढांचे के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश करने की तैयारी में है। कंपनी ने मौजूदा 20 मिलियन टन की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 35 मिलियन टन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट (आईएसपी), बोकारो और भिलाई स्टील प्लांट के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा राउरकेला स्टील प्लांट को भी संभावित विस्तार योजना में शामिल किया गया है।
सेल के चेयरमैन अशोक कुमार पांडा ने निवेशकों के साथ बातचीत में कंपनी की भावी रणनीति, उत्पादन क्षमता, पूंजीगत निवेश, कर्मचारियों की संख्या और वित्तीय प्रदर्शन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
उन्होंने बताया कि कंपनी अगले तीन से चार वर्षों में लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेगी। इसका उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ संयंत्रों के आधुनिकीकरण और परिचालन दक्षता में सुधार करना है।
आईएसपी में शुरू हुआ काम, बोकारो और भिलाई में भी तैयारी
विस्तार परियोजनाओं की प्रगति के संबंध में चेयरमैन ने बताया कि बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट में विस्तार का काम शुरू हो चुका है। परियोजना के महत्वपूर्ण पैकेजों के लिए ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हैं। वहीं, बोकारो स्टील प्लांट में टेंडर प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है।
भिलाई स्टील प्लांट में भी जल्द टेंडरिंग शुरू होने की संभावना है। राउरकेला स्टील प्लांट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार है, जिसे सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस प्रकार अलग-अलग चरणों में चल रही परियोजनाओं के माध्यम से सेल अपनी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करना चाहता है।
चार वर्षों में 1.20 लाख करोड़ रुपये का पूंजी निवेश
सेल ने चालू वित्त वर्ष के लिए 15 हजार करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का लक्ष्य रखा है। पहली छमाही में कंपनी लगभग 5,500 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। तीसरी और चौथी तिमाही में अतिरिक्त 9 से 10 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।
अगले वित्त वर्ष में पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है, जबकि इसके अगले वर्ष यह बढ़कर लगभग 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस निवेश में आईएसपी की परियोजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके बाद बोकारो और भिलाई स्टील प्लांट के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
2031 तक नियमित कर्मचारियों की संख्या होगी 26 हजार
कंपनी की मानव संसाधन नीति में भी बड़े बदलाव की योजना है। चेयरमैन के मुताबिक, दूसरी तिमाही के अंत तक सेल में नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 48 हजार रह गई थी।
चालू वित्त वर्ष के अंत तक इसे घटाकर करीब 46 हजार करने का अनुमान है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2031 तक नियमित कर्मचारियों की संख्या घटाकर 26 हजार करना है। इसके माध्यम से मानव संसाधन लागत पर नियंत्रण और परिचालन दक्षता बढ़ाने की रणनीति अपनाई जाएगी।
21 मिलियन टन उत्पादन की उम्मीद
उत्पादन के मोर्चे पर सेल को चालू वित्त वर्ष में लगभग 21 मिलियन टन उत्पादन हासिल होने की उम्मीद है। पहली छमाही में कंपनी ने 9.33 मिलियन टन उत्पादन किया है।
चेयरमैन के अनुसार, तीसरी और चौथी तिमाही में उत्पादन एवं बिक्री सामान्यतः बेहतर रहती है। इसलिए निर्धारित वार्षिक लक्ष्य हासिल करने की संभावना बनी हुई है।
कोयले की कीमतों से बढ़ी उत्पादन लागत
आयातित कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी की उत्पादन लागत पर दबाव पड़ा है। पहली तिमाही में कोयले की औसत दर 21,300 रुपये प्रति टन थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 22,930 रुपये हो गई।
अक्टूबर में यह लगभग 24,100 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई। हालांकि, तीसरी तिमाही में इसके 23,500 रुपये और चौथी तिमाही में लगभग 22 हजार रुपये प्रति टन तक आने की संभावना जताई गई है।
स्टील की कीमतों में सुधार से मुनाफे की उम्मीद
दूसरी तिमाही में लॉन्ग उत्पादों का औसत शुद्ध बिक्री मूल्य 54,400 रुपये और फ्लैट उत्पादों का 57 हजार रुपये प्रति टन रहा। अक्टूबर में यह क्रमशः बढ़कर 58,700 रुपये और 61,700 रुपये प्रति टन हो गया। इससे कंपनी को आगे बेहतर बिक्री मूल्य मिलने की उम्मीद है।
दूसरी तिमाही में प्रति टन एबिटा लगभग 8,170 रुपये रहा, जबकि पहली छमाही का औसत 9,561 रुपये दर्ज किया गया। अत्यधिक बारिश और कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी से प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
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