रवींद्र सिंह धामी, काशीपुर

पौराणिक नगर काशीपुर का शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्णिम इतिहास रहा है। 606-647 ईसा पूर्व गोविषाण राज्य था। ह्वेनसांग ने पुस्तक में कहा है कि गौविषाण में 101 भिक्षु थे। स्कंद पुराण में पवित्र द्रोणासागर का जिक्र है। गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों को शिक्षा दी थी। एक बार फिर काशीपुर के एजुकेशन हब बनने की ओर एक और कदम रखा गया है।

नगर का स्कंद पुराण में उल्लेख है। महाभारत काल में द्रोणासागर में जहां पांडवों को आचार्य द्रोणाचार्य द्वारा शिक्षा देने का उल्लेख है, वहीं ह्वेनसांग ने 631-641 ईसा पूर्व में यात्रा की थी। काशीपुर का नाम काशीनाथ अधिकारी के नाम से चंद वंशीय राजाओं ने 16-17वीं शताब्दी में इसका नाम रखा। गिरिताल व द्रोणासागर से पांडवों की कहानी जुड़ी है। पांडवों ने गुरुदक्षिणा में द्रोणासागर को द्रोणाचार्य को दिया था। इसके अलावा गौविषाण में अशोक ने बौद्ध स्तूप बनाया था। इसमें महात्मा बुद्ध ने उपदेश दिए थे। प्राचीन काल से क्षेत्र शिक्षा के लिए प्रमुख रहा है।

इधर, केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि आठ नए संस्थानों में काशीपुर सेमी अरबन क्षेत्र में है। इससे न केवल प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलेगा, बल्कि क्षेत्र का विकास होगा। मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने पूरी देवभूमि के इतिहास को रखते हुए कहा कि देवभूमि में आयुर्वेद, संस्कृत भाषा की जन्म स्थली है। शल्य चिकित्सा में भी भगवान गणेश का उदाहरण देते हुए कहा कि देवभूमि में ही गणेश भगवान का सिर कटने का हाथी का लगा दिया गया था। शल्य चिकित्सा की परिपाटी प्राचीन काल से रही है। उन्होंने कहा कि आइआइएम से निकले छात्र प्रदेश के उद्योगों को नई ऊंचाइयां प्रदान करेंगे। पौराणिक काल से शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख काशीपुर एक बार फिर एजुकेशन हब बनने की ओर अग्रसर है।

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