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शहर की नौकरी छोड़ रोबिन ने बंजर जमीन को बनाया उपजाऊ, मुर्गीपालन और बागवानी से लाखों की कमाई

Published: Sat, 31 Oct 2026 10:36 AM (IST)

रोबिन वर्मा ने शहर की नौकरी छोड़ उत्तरकाशी के लोदन गांव में 50 नाली बंजर जमीन पर स्वरोजगार शुरू किया। ...और पढ़ें

अपने पोल्ट्री फार्म में रोबिन वर्मा। स्रोत स्वयं

अपने पोल्ट्री फार्म में रोबिन वर्मा। स्रोत स्वयं

HighLights

  1. शहर की नौकरी छोड़ गांव में स्वरोजगार अपनाया।

  2. बंजर जमीन पर मुर्गीपालन, बागवानी से लाखों कमाए।

  3. युवाओं के लिए प्रेरणा बने रोबिन वर्मा।

दयाराम थपलियाल, उत्तरकाशी। स्वरोजगार की चाह रखने वाले युवाओं के लिए उत्तरकाशी के लोदन गांव निवासी 32 वर्षीय रोबिन वर्मा किसी मिशाल से कम नहीं हैं। गुजरात की रिफाइनरी और देहरादून के निजी अस्पताल में काम करने के बाद वह गांव लौटे तो उनके सामने 50 नाली बंजर भूमि थी।

अधिकांश लोग जहां इस जमीन को अनुपयोगी बता रहे थे। वहीं, रोबिन ने इसमें रोजगार की संभावनाएं तलाशीं। उन्होंने बागवानी, मुर्गीपालन, पौध उत्पादन और एकीकृत खेती के जरिये इसे आजीविका का आधार बनाया। आज उनका प्रयास पहाड़ में स्वरोजगार, कृषि विविधीकरण और पलायन के विकल्प की प्रेरक मिसाल बन रहा है।

जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से करीब 140 किलोमीटर दूर नौगांव ब्लाक के लोदन गांव निवासी रोबिन ने उच्च शिक्षा के बाद रोबिन ने 2017 से 2019 तक गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी और 2019 से 2020 तक देहरादून के एक निजी अस्पताल में प्रबंधक के रूप में काम किया।

कोविड काल में नौकरी छोड़ गांव लौटे और खेती को आजीविका बनाने का फैसला किया। रोबिन की कहानी बताती है कि पहाड़ की बंजर जमीन में भी संभावनाओं के बीज बोए जा सकते हैं। जरूरत है उन्हें पहचानने, मेहनत करने और नए प्रयोग अपनाने की।

40 चूजों से शुरू किया मुर्गीपालन, अब फार्म में चार हजार पक्षी

रोबिन ने वर्ष 2021 में पशुपालन विभाग से मिले 40 चूजों और सरकार की 60 हजार रुपये की सहायता से उन्होंने मुर्गीपालन शुरू किया। अब उनके फार्म में ब्रायलर, लेयर और क्रायलर नस्लों के करीब चार हजार पक्षी हैं। रोबिन के अनुसार, इससे उन्हें सालाना चार से पांच लाख रुपये का शुद्ध लाभ होता है। उनके फार्म से चार स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिला है।

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नर्सरी में तैयार किए दो लाख से अधिक पौधे

अपनी 50 नाली जमीन में से करीब 25 नाली में उन्होंने सेब और कीवी के बगीचे विकसित किए हैं। वर्ष 2022 में लगाए गए सेब के 500 पेड़ फल देने लगे हैं। वर्ष 2024 में लगाए गए एक हजार नए पेड़ों से 2027 से उत्पादन की उम्मीद है। कीवी के 60 पौधों से उत्पादन शुरू हो गया है।

पुराने अखरोट के पेड़ों से सालाना करीब पांच क्विंटल उपज मिलती है और 200 नए पौधे भी लगाए गए हैं। करीब 35 नाली में चुल्लू और अखरोट की पौधशाला से वह अब तक दो लाख से अधिक पौधे बेच चुके हैं। छह बाक्स से मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन भी कर रहे हैं।

सम्मानों से बढ़ा हौसला

रोबिन को बागवानी में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 2023 में राज्यपाल ने सम्मानित किया। 2025 में सहकारिता विभाग का उत्कृष्ट कृषक सम्मान और हमराही कल्याण संस्थान का ‘हमारे नायक’ सम्मान मिला। 2026 में जल संरक्षण के योगदान के लिए वन विभाग ने सम्मानित किया। पिता शिवदास, मां गुडीदेव और पत्नी पूजा ने उनके सफर में सहयोग दिया। रोबिन का उद्देश्य युवाओं को गांव में रोजगार के अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करना है।

रोबिन जैसे युवा शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। युवा स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ायें तो स्वयं के साथ कई अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ सकते हैं।

-डाॅ. रजनीश सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।

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