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आमी नदी के किनारे बसा बतखों का नया संसार, वाराणसी से गोरखपुर पहुंचे सुदर्शन ने शुरू किया नया व्यवसाय

Published: Sun, 18 Oct 2026 07:45 PM (IST)

गोरखपुर के खजनी क्षेत्र में आमी नदी के किनारे बतख पालन एक नए रोजगार विकल्प के रूप में उभर रहा ...और पढ़ें

आमी नदी के किनारे बसा बतखों का नया संसार।

आमी नदी के किनारे बसा बतखों का नया संसार।

HighLights

  1. गोरखपुर में आमी नदी किनारे बतख पालन का नया केंद्र।

  2. वाराणसी के सुदर्शन ने 2200 बतखों से व्यवसाय शुरू किया।

  3. कम लागत में अधिक मुनाफे वाला ग्रामीण स्वरोजगार विकल्प।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की चाह लोगों को पारंपरिक व्यवसायों से इतर नए विकल्पों की ओर आकर्षित कर रही है। खेती-किसानी व पशुपालन के बीच बतख पालन भी एक ऐसे ही व्यवसाय के रूप में उभर रहा है, जिसमें कम संसाधनों के सहारे रोजगार व आमदनी की नई राह तलाशी जा रही है। खजनी क्षेत्र के उनवल में आमी नदी का किनारा इन दिनों बतख पालन का नया ठिकाना बन गया है।

नदी के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और पानी की उपलब्धता यहां बतख पालन के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रही है। आमी नदी के किनारे बतखों के झुंड अब ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार की एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।

वाराणसी के रहने वाले सुदर्शन भी इसी उम्मीद के साथ उनवल पहुंचे हैं। वह अपने साथ 2200 बतख लेकर यहां आए हैं। आमी नदी के किनारे बतख पालन का काम शुरू कर उन्होंने इस व्यवसाय में अपनी संभावनाएं तलाशनी शुरू की हैं।

सुदर्शन के लिए यह केवल बतख पालने का काम नहीं, बल्कि कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल करने की एक कोशिश भी है। बड़ी संख्या में बतखों के साथ नदी किनारे उनका यह कारोबार लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बतख पालन की खासियत यह है कि इसके लिए बहुत बड़े व महंगे संसाधनों की अनिवार्यता नहीं होती है।

पानी और खुले स्थान की उपलब्धता इस व्यवसाय को शुरू करने में सहायक हो सकती है। यही वजह है कि नदी और तालाबों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए बतख पालन रोजगार का एक विकल्प बन सकता है। हालांकि, इसमें भी बतखों के रखरखाव, उनके आहार, स्वास्थ्य और बाजार में मांग का ध्यान रखना जरूरी होता है।

उनवल में आमी नदी का किनारा अब इस नए व्यवसाय के लिए पहचान बनाने लगा है। यहां बतख पालक की मौजूदगी से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों की संभावनाएं भी दिखाई दे रही हैं। वाराणसी से 2200 बतख लेकर पहुंचे सुदर्शन की पहल इस बात की मिसाल है कि पारंपरिक कामकाज से अलग हटकर भी आजीविका के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं।

कम खर्च में बेहतर मुनाफे की उम्मीद के साथ शुरू हुआ यह प्रयास क्षेत्र में बतख पालन की संभावनाओं को भी सामने ला रहा है। प्राकृतिक वातावरण अनुकूल होने की वजह से यहां बतख जल्द अंडा देना शुरू कर देंगे।

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