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    Chardham Yatra 2025: यमुनोत्री में उपयोग में लाए जा रहे घोड़े खच्चरों में अज्ञात बीमारी से हड़कंप

    यमुनोत्री धाम की यात्रा में लगे घोड़े-खच्चरों में खांसी की बीमारी फैल गई है जिससे संचालक परेशान हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने 30 से अधिक सैंपल जांच के लिए भेजे हैं और उपचार जारी है। संचालकों ने सरकार से विशेष दल भेजने की मांग की है। प्रशासन निगरानी रख रहा है और बीमार पशुओं को आराम देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यात्रा सुरक्षित रहे।

    By Jagran NewsEdited By: Nitesh Srivastava Updated: Tue, 03 Jun 2025 03:06 PM (IST)
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    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। जागरण

    संवाद सूत्र, बड़कोट। यमुनोत्री धाम में चारधाम यात्रा के दौरान उपयोग में लाए जा रहे घोड़े-खच्चरों में अज्ञात बीमारी फैलने से हड़कंप मचा हुआ है। जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक सेवा में लगे अधिकांश पशुओं में लगातार खांसी की समस्या देखी जा रही है, जिससे संचालक डरे व सहमे हुए हैं।

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    कई घोड़े-खच्चर बीमार होने के चलते उनके मालिक उन्हें वापस ले जा चुके हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए 30 से अधिक घोड़े-खच्चरों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जबकि इस बीच विभागीय दल उपचार कार्य में लगा हुआ है।

    घोड़े-खच्चर संचालक गुरुदेव, लोकेंद्र, उपेंद्र, दिनेश व राम सिंह का कहना है कि अचानक पशुओं में खांसी की शिकायत सामने आ रही है। हालांकि पशु चिकित्सकों द्वारा दी जा रही दवाएं अभी तक ज्यादा असर नहीं दिखा रही हैं।

    संचालकों ने सरकार से विशेष पशु चिकित्सक दल भेजने की मांग की है, ताकि बीमारी पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके। जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एचएस बिष्ट ने बताया कि जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम के बीच सेवा दे रहे कुछ घोड़े-खच्चरों में खांसी की शिकायत आई है।

    रेंडम सैंपलिंग के तहत 30 पशुओं के नमूने जांच को भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट जल्द ही प्राप्त होगी। बताया कि उपचार कार्य के साथ ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस से सहयोग लिया जा रहा है, ताकि बीमार पशुओं को यात्रा मार्ग पर न चलाया जाए।

    पशुचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बीमार पशुओं को विश्राम दिया जाए और पूरी तरह ठीक होने पर ही सेवा में लगाया जाए। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं की यात्रा भी सुरक्षित बनी रहे और पशुओं का भी समय पर उपचार हो सके।

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