भारी बारिश से खतरे की जद में उत्तरकाशी, हर्षिल व स्यानाचट्टी के बाद अब पड़गाड में बनी झील; अलर्ट जारी
उत्तराकाशी में मानसून के चलते भटवाड़ी के पापड़गाड में भागीरथी नदी पर झील बन गई है जिससे आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है। मलबा और बोल्डर आने से नदी का प्रवाह रुक गया है। स्यानाचट्टी और हर्षिल में भी झीलों से पानी की निकासी के लिए चैनलाइजेशन का काम चल रहा है। पहले भी इन क्षेत्रों में झीलें बन चुकी हैं।

जासं, उत्तरकाशी। इस बार मानसून उत्तरकाशी पर कहर बनकर टूट रहा है। अब उत्तरकाशी पर एक और खतरे ने दस्तक दी है। उत्तरकाशी में हर्षिल, स्यानाचट्टी के बाद भटवाड़ी के पापड़गाड में भागीरथी नदी पर झील बन गई है। जिसके बाद भटवाड़ी सहित नदी से लगते हुए क्षेत्रों में लोगों को अलर्ट रहने निर्देश जारी किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक गुरुवार देर रात पापड़गाड़ में मलबा और बोल्डर आने से भागीरथी नदी का प्रवाह रुक गया। प्रवाह रुकने से 100 मीटर क्षेत्र में झील बन गई है।
स्यानाचट्टी व हर्षिल में झील से पानी की निकासी को चैनलाइजेशन जारी
स्यानाचट्टी व हर्षिल में बनी झील से पानी की निकासी को चैनलाइजेशन का काम जारी है। दोनों ही जगह एक्सावेटर व बैक हो लोडर मशीनें मलबा हटाकर नदी का मुहाना चौड़ा करने में लगी हैं। स्यानाचट्टी में यमुना नदी का जलस्तर पुल से 3 फीट नीचे है। वहीं, हर्षिल-धराली के बीच बनी झील का जलस्तर भी पहले से काफी कम हो चुका है।
बता दें कि बीते 5 अगस्त को जहां हर्षिल-धराली में आपदा के दौरान विशालकाय झील का निर्माण हुआ। वहीं, स्यानाचट्टी में बीते 28 जून से ही अस्थायी झील बनने की समस्या बनी हुई है। बीते 21 अगस्त की शाम को कुपड़ा गाड के उफान के साथ आए मलबे के कारण अचानक यमुना नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने से झील बन गई थी। अ
गले दिन रात को मूसलाधार वर्षा के चलते यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने झील प्राकृतिक रूप से खाली हो गई। लेकिन फिर गत रविवार को झील दोबारा बनना शुरू हुई। बीते बुधवार से दोनों जगह झील से पानी की निकासी को मशीनों को उताकर मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। स्यानाचट्टी में 15 मीटर लंबाई व 3 मीटर चाैड़ाई में मलबा हटाया गया। इधर, हर्षिल में भी झील से पानी की निकासी को बढ़ाने के लिए भागीरथी नदी के मुहाने को चौड़ा किया जा रहा है।
पुल पर बढ़े खतरे को कम करने के लिए भी हटाया मलबा
स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर बनी झील से मोटरपुल पर भी खतरा बना हुआ था। यहां पुल के पास से ही एक्सावेटर मशीन ने झील में उतरकर मलबा हटाया है, जिसके बाद अधिकारियों ने पुल पर किसी तरह के खतरे से इंकार किया है।
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