एक वर्ष में 7 गर्भवती व 9 नवजात की हुई मौत
शैलेंद्र गोदियाल, उत्तरकाशी सीमांत जनपद उत्तरकाशी में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बदहाल है। महिला स्वास्थ्य की स्थिति तो जनपद में सबसे चिंताजनक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष सात गर्भवती महिलाओं और नौ नवजात शिशुओं की मौत हुई थी, जबकि इस वर्ष अप्रैल से लेकर 2 अगस्त तक दो गर्भवती महिलाओं व तीन नवजात शिशुओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं राष्ट्रीय कार्यक्रमों के तहत गर्भवती व नवजात की मृत्युदर में कमी लाने पर जोर दिया जा रहा है। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सबसे बुरा हाल है। गंगा घाटी में जिला अस्पताल होने के कारण स्वास्थ्य सुविधा कुछ संतोषजनक है। लेकिन जिला मुख्यालय से सौ किलोमीटर से लेकर ढाई सौ किलोमीटर दूर यमुना और टौंस घाटी में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल अच्छा नहीं है। यहां के सीएचसी पुरोला, सीएचसी नौगांव, सीएचसी बडकोट व पीएचसी मोरी में अगर कोई प्रसव पीड़िता गंभीर स्थिति में आ गई तो चिकित्सकों के पास उसे रेफर करने के अलावा कोई चारा नहीं रहता। पुरोला सीएचसी में प्रसूति रोग विशेषज्ञ व स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती कुछ समय पहले हुई है। लेकिन, ब्लड बैंक, ओटी, चाइल्ड केयर वार्ड जैसे महत्वपूर्ण सुविधा न होने के साथ एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, सर्जन सहित कई विशेषज्ञ भी नहीं हैं। सीएचसी नौगांव में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन रेडियोलाजिस्ट नहीं है। पुरोला में डिप्टी सीएमओ के भरोसे रेडियोलाजिस्ट की जिम्मेदारी है, जबकि अन्य सीएचसी की स्थिति तो और बदहाल है। गांव में गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच करवाने के लिए प्रेरित करने वाली आशा कार्यकर्त्ताओं की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। गर्भवती महिलाओं की होने वाली जांच की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। लेकिन, बैठकों में उच्च अधिकारी जरूरी रूप से गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कमी लाने के लिए निर्देशित करते हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी एक कान से सुनते हैं और दूसरे निकाल देते हैं। ------------ उत्तरकाशी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुरोला, नौगांव और चिन्यालीसौड़ में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। सीएचसी पुरोला में प्रसूति रोग विशेषज्ञ व स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात है। ब्लड बैंक, ओटी, चाइल्ड केयर वार्ड व अन्य सुविधाओें के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य निदेशालय में पत्राचार किया जा रहा है। -डा. केएस चौहान, मुख्य चिकित्साधिकारी उत्तरकाशी -------
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