सूर्यकुंड में पके चावलों का है महत्व
द्वारिका सेमवाल, बड़कोट : मा यमुना के दर्शनों के साथ-साथ यमुनोत्री धाम में यमुना मंदिर एवं दिव्य शिला के बीच स्थित सूर्य कुंड में पके चावलों का बड़ा महत्व है। सूर्य कुंड से उबलते हुए पानी की निकलने वाली धारा में श्रद्धालु पोटली में चावल बाधकर डालते हैं, जो कुछ ही समय बाद पक जाते हैं और श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
यमुनोत्री धाम में मा यमुना के साथ ही यूं तो अनेक स्थल दर्शनीय हैं और सभी का अलग-अलग महत्व है। इनमें सूर्य कुंड से निकलने वाली जलधारा में पके चावलों का बहुत बड़ा महात्म्य है। यमुनोत्री मंदिर के निकट सूर्यकुंड से निकलती गर्म जलधारा में श्रद्धालु पोटली में चावल बांधकर डाल देते हैं। कुछ समय बाद यह चावल पक जाता है और मंदिर में इसका भोग लगाकर प्रसाद स्वरूप श्रद्धालु घर ले जाते हैं। सूर्यकुंड के निकट ही तप्त कुंड में भी गर्म जलधारा प्रवाहित होती है। इसमें श्रद्धालु स्नान कर यात्रा की थकान उतारते हैं। वैज्ञानिक आधार के अनुसार यमुनोत्री धाम में भूमिगत गंधक की चट्टानों के कारण यहां स्रोतों से गर्म पानी निकलता है। गंधक के संपर्क में आने से पानी रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप गर्म हो जाता है। यमुनोत्री धाम में गर्म पानी के स्रोत आस्था का केंद्र बन गए हैं। यही वजह है कि यमुनोत्री धाम में इन गर्म जलधाराओं के प्रसाद और स्नान का महत्व माना जाता है।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि यमुनोत्री धाम में मा अवतरित होने पर यमुना ने सूर्य से अपनी किरणों का अंश यमुनोत्री में होने का वरदान मागा। सूर्यदेव ने अपनी पुत्री यमुना का आग्रह मानकर वरदान दिया कि सूर्य की एक किरण के कई अरबवें अंश का मामूली प्रभाव यहा पर सदैव मौजूद रहेगा। उसी अंश से यमुनोत्री धाम में दो जल धाराएं निकलती हैं, जिसमें एक सूर्य कुंड और दूसरी तत्पकुंड में प्रवाहित हो रही है।
मा यमुना सूर्य पुत्री हैं और पुत्री दो कुलों का उद्धार करती है। मा यमुना ने भूलोक में उतरने पर सूर्य देव से अपनी किरणों के अंश के यहा स्थित होने का वरदान मागा। सूर्य कुंड में पके चावलों का बड़ा ही महातम्य है। इस प्रसाद से तेज एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। जबकि, तप्त कुंड में स्नान करने से जन्म जन्मातरों के पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है
पुरुषोत्तम उनियाल, सचिव यमुनोत्री मंदिर समिति।
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