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रुद्रपुर में धान खरीद भुगतान में 25 दिन की देरी, किसानों की दीपावली फीकी, सरकार ने किया था 72 घंटे में भुगतान का वादा

Published: Sun, 08 Nov 2026 02:32 PM (IST)

रुद्रपुर में धान खरीद के 72 घंटे के वादे के बावजूद किसानों को 25 दिन बाद भी भुगतान नहीं मिला ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। जिले में धान खरीद प्रक्रिया ने किसानों की टेंशन बढ़ा रखी है। पहले धान बिक्री शुरू न होने को लेकर किसानों को आंदोलन करना पड़ा और अब धान खरीद शुरू हो गई तो भुगतान के लिए रोना पड़ रहा है।

जागरण की टीम ने कई क्रय केंद्रों पर जाकर किसानों से खरीद प्रक्रिया भुगतान को लेकर जब बात की गई तो उनकी पीड़ा जुबां पर आ गई। किसानों का कहना है कि पहले सिस्टम ने रुलाया, फिर मौसम ने मारा और अब विभाग उनकी उपज का भुगतान लटका रहा है।

उन लोगों ने समय से इसलिए कटाई कराकर धान क्रय केंद्रों तक पहुंचाया ताकि समय से भुगतान मिल जाएगा तो उनके घर भी रोशनी से जगमगा उठेंगे और बच्चों की दीपावली मन सकेगी। मगर अब भुगतान के लिए चक्कर लगवाए जा रहे हैं।

किसान नेताओं के अनुसार विभाग ने 72 घंटों के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं, लेकिन यहां तो 25 दिन बीत चुके हैं, लेकिन भुगतान का कोई अता-पता नहीं है। ऐसे में उनकी दीपावली को फीकी ही हो गई। जागरण से बातचीत में किसानों ने यह पीड़ा बयां की...

हाई कोर्ट में दिया शपथपत्र भी झूठा कर दिया : डॉ. उपाध्याय

प्रगतिशील किसान डॉ. गणेश उपाध्याय ने बताया कि धान तौल एक अक्टूबर से प्रारंभ हो चुकी है, आज 25 दिन से ऊपर हो चुका है। किसानों का धान का भुगतान अभी नहीं हो पाया है। जिसमें खुद उनका 1.23 लाख रुपये का भुगतान लटका हुआ है।

उन्होंने नैनीताल हाई कोर्ट की डबल बेंच में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई में उत्तराखंड सरकार ने यह एफिडेविट दिया है कि 24 घंटे से लेकर 72 घंटे के अंदर किसानों के धान व गेहूं का भुगतान किया जाएगा। बावजूद अधिकारी उसका पालन करने को तैयार नहीं हैं। भुगतान के लिए जल्द आंदोलन छेड़ा जाएगा।

साहब, चक्कर काटते-काटते परेशान हैं, भुगतान मिले तो : फिरोज

मलपुरा के किसान फिरोज मलिक का कहना है कि बारिश के बाद उनका सारा धान भीग गया। उसको जैसे-तैसे सुखाया। कई दिनों तक किच्छा मंडी समिति में उनका धान लदी ट्रालियां खड़ी रहीं, इसी बीच बारिश हो गई। सारा धान फिर भीग गया।

अधिकारियों को फोन मिलाए, अनुरोध किया। जब मंडी में धरना प्रदर्शन किया तब जाकर धान की तुलाई हुई। लेकिन भुगतान के लिए वे लगातार चक्कर काट रहे हैं। जल्द कराने का आश्वासन तो दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक हुआ नहीं है। इस हालत में त्योहार क्या मनाएं, अधिकारियों ने सब फीका कर दिया है।

शासनादेश को आधार बनाकर कोर्ट जाएंगे : मलिक

किसान सुल्तान मलिक का कहना है कि 15 अक्टूबर को उन्होंने धान बेच दिया था। 1.94 लाख रुपये का भुगतान बना है। उसके लिए इतनी बार अधिकारियों के आगे गिड़गिड़ा चुका हूं लेकिन अधिकारी सिवाय भरोसे कुछ कर ही नहीं पा रहे हैं।

वे अधिवक्ताओं से मिले हैं। शासनादेश को आधार बनाते हुए जल्द ही कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा हूं। इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले दीप पर्व के बाद आंदोलन भी किया जाएगा। मिलक कहते हैं कि इसीलिए किसान खेतीबाड़ से मोहभंग कर रहे हैं।

नहीं उठा डिप्टी आरएमओ का फोन

डिप्टी आरएमओ वरुण कुमार से किसानों को भुगतान न मिलने संबंधी समस्या पर बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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