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    नीम के पत्ते से तैयार करें जैविक खाद, मिलेगा बेहतर उत्पादन, पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

    By Jagran NewsEdited By: Skand Shukla
    Updated: Thu, 06 Oct 2022 01:24 PM (IST)

    रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग किए बिना खेती बारी करना असंभव सा होता जा रहा है। इससे उबरने के लिए काशीपुर के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा नीम पत्ती गोमूत्र आदि से जैविक खेती करने की दिशा में कदम उठाया गया है।

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    नीम के पत्ते से तैयार करें जैविक खाद, मिलेगा बेहतर उत्पादन, पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

    खेमराज वर्मा, काशीपुर : रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग किए बिना खेती बारी करना असंभव सा होता जा रहा है। कीटनाशकों के प्रयोग से तैयार होने वाली फसल का सेवन करने से मानव जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है।

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    इससे उबरने के लिए काशीपुर के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जैविक खेती करने की दिशा में कदम उठाया गया है। जैविक खेती करने से जहां एक तरफ शुद्ध अनाज, फल, सब्जी व अन्य प्रकार की फसल तैयार होगी तो दूसरी तरफ पर्यावरण के लिए बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

    जैविक खाद बनाने की विधि

    कीटनाशक गोमूत्र, गोबर, चूना, तम्बाकू, हरी मिर्च, निम्बू, एलोबेरा, नीम पत्ती, कनेर का फल और हरी पत्ती आदि से जैविक खाद तैयार किया जा सकता है। इस विधि से कीट मुक्त जैविक खाद तैयार होती है।

    इससे ना केवल पौधे स्वस्थ रहते हैं, बल्कि उसे हम जब चाहे तब तोड़ कर खा भी सकते हैं, जैविक खाद से तैयार पौधों में पर्यावरण भी दूषित नहीं होता है। इस प्रक्रिया में कृषि लागत घटने और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ने की पूर्ण गारंटी होती है।

    कैसे करें नीम का प्रयोग

    गोबर और खर पतवार को एक गड्ढे में डालें। उसमें गोबर के आधा मात्रा में पानी भर दें। गड्ढे में दो फुट तक गोबर होने पर नीम के पत्ते को फैला कर हल्का से दबा दें। उसके बाद ऊपर पुन: गोबर डालें और गोबर की दूसरी लेयर पूरी होने पर दोबारा नीम के पत्तों को फैलाकर पानी भर दें।

    ऐसा करके इसे तीन से छह महीने के लिए छोड़ दें और समय-समय पर पानी का छिड़काव करते रहें। उसके बाद जैविक खाद बनकर तैयार हो जाएगा। जिसे खेत में डाला जा सकता है। काशीपुर के प्रगतिशील कृषक जैविक खाद बनाने की पहल शुरू कर दिए हैं।

    नीम से कीट मुक्त होता है खाद

    आजकल सभी प्रकार की फसलों में रासायनिक उर्वरकों का ही प्रयोग किया जाता है। इन खादों का भी स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। कैंसर से लेकर अनेक प्रकार की बीमारियां इनकी ही देन मानी जाती है। ऐसे में किसानों को जागरूक बनाने की जरूरत है।

    किसान जिस तरह से नीम की पत्तियों एवं अन्य सामग्री से देसी कीटनाशक तैयार कर सकते हैं उसी प्रकार नीम की पत्तियों और निबोलियों को गड्ढे में गला कर बढ़िया कंपोस्ट खाद तैयार की जा सकती है। यदि नीम की पत्तियों से बनी खाद फसलों में डाली जाएगी तो इसके असर से कई तरह के कीटों का प्रकोप नहीं होगा।

    जैविक खाद अपनाने पर दिया जोर

    डॉ शशि कमल, भूमि संरक्षण अधिकारी ऊधम सिंह नगर ने बताया कि इस समय खेती में नई किस्मों का प्रवेश, आधुनिक तकनीकि का समायोजन और रासायनिक पदार्थों का उपयोग रहा है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति खत्म होने लगी है। धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों से निर्भरता खत्म करने और जैविक खाद अपनाने पर जोर देने की कोशिश है।

    डॉ जितेंद्र क्वात्रा, प्रभारी अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र-काशीपुर का कहना है कि इन दिनों किसानों को जैविक खेती के लिए पहल शुरू की गई है। जैविक खाद तैयार करने में ज्यादा लागत भी नहीं आता है।