किच्छा-सिरौलीकलां पालिका चुनाव: आज खुलेगा मतपेटियों का राज, बेहड़ या शुक्ला किसका पलड़ा भारी?
किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव के नतीजे आज घोषित होंगे, जो विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की सियासी पकड़ का फैसला करेंगे।
HighLights
किच्छा-सिरौलीकलां पालिका चुनाव के नतीजे आज होंगे घोषित
विधायक बेहड़ और पूर्व विधायक शुक्ला की प्रतिष्ठा दांव पर
यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा
अनुज सक्सेना, रुद्रपुर। किच्छा और सिरौलीकला दो नगर पालिकाओं का चुनाव भले छोटा हो, लेकिन सियासत का दांव बड़ा लगा हुआ है। दोनों निकायों के मतदाताओं ने 22 सितंबर को अपना फैसला मतपेटियों में बंद कर दिया था।
अब वही सियासी फ़ैसला बुधवार को बंद मतपेटियों से बाहर आएगा, जिसमें परिणाम सिर्फ दो पालिकाओं के अध्यक्ष की कुर्सी तय नहीं करेगा, बल्कि क्षेत्र की सियासी हवा का रुख भी बताएगा।
किच्छा में विधायक तिलकराज बेहड़ की सियासी पकड़ की परीक्षा है तो भाजपा के पूर्व विधायक शुक्ला के लिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती। ऐसे में मतगणना से पहले तेजी से घूम रही चुनावी हवा ‘बेहड़ में है दम या फिर शुक्ला भी नहीं कम’ इसकी तस्वीर को भी साफ कर देगी।
मतगणना पर लगी रोक ने दोनों ही खेमों की धड़कनें बढ़ा रखीं थीं। मतदान के बाद प्रत्याशियों और समर्थकों ने अपने-अपने गणित लगाए, बूथवार आंकड़ों को खंगाला और जीत के दावे किए। मगर अंतिम फैसला मतपेटियों में बंद है। अब मतगणना के बाद ही पता चलेगा कि जनता ने किसके पक्ष में अपना विश्वास जताया है।
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किच्छा में जीत - हार से ज्यादा प्रतिष्ठा और वर्चस्व की परीक्षा
किच्छा की राजनीति में विधायक तिलकराज बेहड़ का अपना प्रभाव है। बेहड़ की सक्रियता का असर देखने को मिलता रहा है। इस निकाय चुनाव में भी पार्टी प्रत्याशी का नाम भले राजेश प्रताप सिंह हो लेकिन पूरे चुनाव की कमान बेहड़ के हाथ ही रही। दूसरी ओर भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला हैं।
काफी समय से इस क्षेत्र की राजनीति कर रहे शुक्ला को भी यह चुनाव राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत दिखाने का बड़ा अवसर है। यहां भी वही स्थिति है भाजपा प्रत्याशी संदीप अरोड़ा हैं लेकिन प्रतिष्ठा राजेश शुक्ला की दांव पर है, अरोड़ा के लिए राजेश ने दिन - रात एक भी किया है।
ऐसे में अध्यक्ष पद का परिणाम दोनों नेताओं के क्षेत्रीय प्रभाव का आकलन भी कराएगा। यदि परिणाम बेहड़ के पक्ष में जाता है तो यह उनके सियासी प्रभाव की मजबूती का संदेश होगा। वहीं भाजपा प्रत्याशी की जीत शुक्ला के लिए क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा संकेत मानी जाएगी।
सिरौलीकलां में भी दिलचस्प मुकाबला
सिरौलीकलां नगर पालिका का परिणाम भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। यहां मुकाबले के साथ स्थानीय समीकरण, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ की परीक्षा होगी। उसकी वजह यहां एक प्रत्याशी कांग्रेस का है जबकि दूसरा निर्दलीय है।
चर्चा यह रही कि निर्दलीय को भाजपा ने पीछे से सपोर्ट दे रखा था। हालांकि यहां मतदान शांतिपूर्ण निपटा था। मतदान के बाद से ही दोनों प्रमुख खेमे अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा करते रहे हैं। अब मतगणना इन दावों की हकीकत सामने लाएगी।
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परिणाम खोलेगा आगे की सियासत का रास्ता
निकाय चुनाव का परिणाम स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों पालिकाओं में जीत-हार का असर आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों और राजनीतिक समीकरणों पर भी दिखाई दे सकता है।
यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक इस चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी मान रहे है। कुल मिलाकर अब मतपेटियां खुलेंगी, वोटों की गिनती होगी और दावों की हकीकत सामने आएगी। किसके सिर सजेगा ताज और किसे मिलेगी शिकस्त... आज तस्वीर साफ हो जाएगी।
