संवाद सहयोगी, बाजपुर : किसान महिला दिवस पर महिला किसानों को सम्मान देने के उद्देश्य से सोमवार का पूरा मंच समर्पित किया गया। इसमें मंच से लेकर धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल आदि की पूर्ण व्यवस्था महिलाओं द्वारा संभाली गई। इसमें बाजपुर की सुनीता टम्टा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। साथ ही गाजीपुर बार्डर से तीनों कानून वापस लेने की मांग की गई।

गाजीपुर बार्डर पर मंच से बोलते हुए सुनीता टम्टा ने कहा कि एक तरफ किसान कृषि कानूनों को वापस लेने की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं तराई के 20 गांवों के किसानों को भी अपनी लगभग छह हजार एकड़ भूमि पर मंडराते खतरे के कारण चिता से गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकारों का चयन लोकहित के लिए किया जाता है, लेकिन सत्ता संभालने के बाद लोग हठधर्मिता पर उतर आए हैं, जिसका खामियाजा देश की 70 प्रतिशत आबादी व 130 करोड़ लोगों का पेट भरने वाले अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है। इस दौरान सुनीता टम्टा व बाजपुर में लगातार धरना दे रहीं किसान बेटियों के कार्य की भी सराहना की गई। इस मौके पर रामनगर से गीता आर्या, ललिता रावत, सरस्वती जोशी, बाजपुर से कौशल्या देवी, दलजीत कौर, कश्मीर कौर, रजवंत कौर, बिदर कौर, तरनजीत कौर व काशीपुर से अनीता आदि मौजूद थी।

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24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठीं 21 महिलाएं

किसान यूनियन की संयुक्त कमेटी द्वारा तय नामों के अनुसार बाजपुर से अमरजीत कौर, रुद्रपुर से परमजीत कौर, रामपुर से सुखविदर कौर, निदर कौर, स्वर्णजीत कौर, बरेली से मुख्तयार कौर व नरेंद्र कौर, गुरदासपुर से मंजीत कौर, मनप्रीत कौर, श्यामली से अंशु भारती, बलिया से संगीता शर्मा, हापुड़ से बबली सिंह, दिल्ली से रीना चौहान, बिलासपुर से जसवीर कौर सहित कुल 21 महिलाओं द्वारा 24 घंटे की भूख हड़ताल की गई।

Edited By: Jagran