संवाद सहयोगी, रुद्रपुर : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ¨सह रावत द्वारा प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक प्रमुख पर्यटन स्थल को विकसित करने की योजना के तहत पर्यटन विभाग ने काशीपुर के पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण द्रोण सागर को चयनित किया है। पर्यटन विभाग इस पर छह करोड़ से अधिक की राशि व्यय कर न केवल विकसित करेगा, अपितु यहां की प्राचीन धरोहरों को भी संरक्षित करेगा।

काशीपुर में द्रोण सागर पांडवकालीन युग से संबधित पुरातात्विक महत्व का स्थल है। यहां द्रोण सागर व गोविषाण टीला पौराणिक धरोहर हैं। यह क्षेत्र वर्तमान में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित है। क्षेत्रवासियों ने इसे विकसित करने की मांग केंद्र व प्रदेश सरकार से की थी। इस पर सांसद भगत ¨सह कोश्यारी के निर्देश पर तीन अप्रैल 2017 को कुमाऊं मंडल विकास निगम ने 531.22 लाख का प्रस्ताव तैयार कर इसे निदेशक पर्यटन देहरादून को भेजा था। अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ¨सह रावत ने प्रदेश के 13 जनपदों में एक-एक पर्यटन स्थल को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की है, इसके तहत अब एक बार फिर जिला पर्यटन विभाग ने इसी द्रोण सागर को विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला पर्यटन अधिकारी बीसी त्रिवेदी ने बताया कि पर्यटन विभाग ने यहां की झील को विकसित करने के साथ ही पर्यटन पार्क, पर्यटकों को बैठने के लिए गजीबों, भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण कराने के साथ ही यहां पहले से बने पौराणिक भवनों को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस पर छह करोड़ से अधिक की राशि व्यय कर इसे जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

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काशीपुर का द्रोण सागर पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसे जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पुरातत्व विभाग की अनुमति मिलते ही इस योजना पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

बीसी त्रिवेदी, जिला पर्यटन अधिकारी, ऊधम¨सहनगर

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