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    NH 74 Scam: डीपी सिंह सहित 22 पीसीएस अधिकारी और कर्मियों की हुई थी गिरफ्तारी, सरकार को लगाया था करोड़ों का चूना

    Updated: Thu, 26 Jun 2025 08:32 PM (IST)

    पीसीएस अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी से उत्तराखंड का एनएच-74 घोटाला फिर चर्चा में आ गया है। यह घोटाला 2016 में सामने आया था, जिसमें कृषि भूमि को गैर-कृषि दिखाकर करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पा गया था। इसमें अधिकारी, नेता और किसान शामिल थे। एसआईटी ने जांच की और 211 करोड़ रुपये के इस घोटाले में कई गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें दिनेश प्रताप सिंह भी शामिल थे।

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    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    जासं, रुद्रपुर। पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी ने एक बार फिर एनएच घोटाला चर्चा में आ गया है। सितारगंज से हरिद्वार तक 252 किमी दूरी के एनएच-74 के निर्माण के लिए वर्ष 2012-13 में प्रक्रिया शुरू की गई थी। यह काम दो हिस्सों में होना था।

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    एक हिस्सा सितारगंज से काशीपुर तो दूसरा हिस्सा काशीपुर से नगीना होते हुए हरिद्वार का था। वर्ष 2016 में इस घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ था जब तत्कालीन मंडलायुक्त डी. सेंथिल पांडियन ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित फाइलें तलब की थीं। कृषि भूमि को गैर कृषि दर्शाकर भारी भरकम मुआवजा लेकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया गया है। इसमें भू-स्वामी किसानों से लेकर सफेदपोश नेता व अधिकारी तक सभी शामिल थे।

    सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाकर जांच शुरू करा दी थी। जांच में सामने आया कि भूमि अधिग्रहण का यह खेल करीब 211 करोड़ का था। मामले में एसआईटी ने पीसीएस अफसर दिनेश प्रताप सिंह सहित कई अन्य पीसीएस अधिकारियों, तहसीलदार, कर्मचारी, बिचौलिए, किसान सहित 22 लोगों की गिरफ्तारी की थी।

    वर्ष 2017 में कब क्या हुआ

    11 मार्च: एडीएम प्रताप शाह की तहरीर पर रुद्रपुर की सिडकुल चौकी में एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नजीमाबाद और रुद्रपुर एनएचएआई देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, जसपुर, गदरपुर, खटीमा, किच्छा, रुद्रपुर, बाजपुर और सितारगंज के एसडीएम, एसडीएम कार्यालय में तैनात रीडर, पेशकार, तहसीलदार राजस्व निरीक्षक, खतौनी से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज।
    12 मार्च: एसएलओ, उनके कार्यालय में तैनात कर्मचारियों का नाम रिपोर्ट में दर्ज।
    3 जून: जसपुर से निलंबित पेशकार विकास चौहान की गिरफ्तारी।
    7 नवंबर: एसआईटी ने निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, संग्रह अमीन अनिल कुमार, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पलड़िया, रिटायर्ड तहसीलदार भोले लाल, अनुसेवक रामसमुझ, स्टांप वेंडर जीशान और किसान ओमप्रकाश, चरन सिंह को बंदी बनाया गया।
    24 नवंबर: घोटाले के मुख्य आरोपी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह ने एसएसपी के आगे सरेंडर किया, डीपी को जेल भेजा गया।
    24 नवंबर: राजस्व अहलमद संजय चौहान, डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे।

    वर्ष 2018 में हुई कार्रवाई

    14 जनवरी: एसआईटी ने पीसीएस अफसर अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह और किसान अमर सिंह को गिरफ्तार किया।
    16 जनवरी: सितारगंज से राजस्व अहलमद संतराम गिरफ्तार।8 फरवरी: एसआईटी ने निलंबित पीसीएस अधिकारी एनएस नगन्याल, चकबंदी अधिकारी अमर सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को जेल भेजा।
    20 मार्च: पुलिस ने गुड़गांव के एक माल से एलाइड इंफ्रा की एमडी प्रिया शर्मा और सुधीर चावला को गिरफ्तार किया।7 जुलाई: बेरीनाग के नायब तहसीलदार रघुवीर सिंह गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।
    9 जुलाई: निलंबित पीसीएस अधिकारी तीरथपाल गिरफ्तार कर जेल भेजे गए।
    10 जुलाई: एसआईटी ने शासन को जांच रिपोर्ट सौंपी।
    11 सिंतबर: शासन ने एसआईटी की जांच आख्या पर आईएएस अफसर डा. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश कुमार यादव को निलंबित कर दिया।