संस्कृत भाषा के माध्यम से छात्रों ने दिखाई प्रतिभा
संवाद सहयोगी, देवप्रयाग : देवप्रयाग के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत भाषा के
संवाद सहयोगी, देवप्रयाग : देवप्रयाग के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत भाषा के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने भाषण, गायन एवं निबंध स्पर्धाओं में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया।
राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्रीरघुनाथ कीर्ति परिसर में संस्कृत सप्ताह के तहत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भारत भूमि व गंगा की महत्ता पर व्याख्यान हुए। वक्ताओं ने गंगा का महत्व बताते हुए उसकी वर्तमान दशा पर चिता व्यक्त की । छात्र-छात्राओं ने कहा कि गंगा को पुराने स्वरूप में लौटने की नितांत आवश्यकता है, वरना आने वाली पीढि़यों को देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं बचेगा। प्रतियोगिताओं में श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर सहित राजकीय आदर्श इंटर कालेज, श्री रघुनाथ कीर्ति संस्कृत महाविद्यालय देवप्रयाग व पतंजलि गुरुकुल मूल्यागांव के छात्रों ने भाग लिया। संस्कृत एकल गान में संस्कृत संस्थान के ध्रुव जोशी प्रथम, अशोक कुमार द्वितीय और आवेश तृतीय स्थान पर रहे। समूह गान में संस्थान के सुभाष भट्ट ग्रुप प्रथम, पतंजलि गुरुकुल खुशी ग्रुप द्वितीय व राइंका देवप्रयाग का दीक्षा ग्रुप तृतीय स्थान पर रहा। संस्कृत भाषा के छह से आठ कक्षा वर्ग में पतंजलि की दीक्षा प्रथम, ज्ञानश्री द्वितीय व खुशी तृतीय स्थान पर रही। संस्कृत भाषा के नौ से बारह कक्षा वर्ग में संस्थान के दीपक नौटियाल प्रथम, मोहित शर्मा द्वितीय स्थान पर रहे। श्रीमद्भागवत गीता 16वां अध्याय कंठपाठ में दीपक नौटियाल प्रथम, अविनाश द्वितीय रहे। श्लोक कंठपाठ शास्त्री आचार्य वर्ग में संस्थान के श्यामदेव प्रथम, आयुष उनियाल द्वितीय व हिमांशु तृतीय स्थान पर रहे। निबंध लेखन छह से आठ वर्ग में पतंजलि की शुभांगिनी प्रथम, अंकिता द्वितीय और ज्योति तृतीय स्थान पर रही। जबकि रुचिका, विदुषी व रोहित को सांत्वना पुरस्कार मिला। कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि 108 स्वामी शरदपुरी महाराज ने पुरस्कार वितरित करते हुए संस्कृत की विश्वव्यापकता के विषय में बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत पढ़ने वाला व्यक्ति कभी भूखा नहीं रह सकता। विशिष्ट अतिथि डॉ. स्वामी केशवानंद ने कहा कि विद्वता के आगे धन का कोई महत्व नहीं होता, इसलिए विद्यार्थी ज्ञानार्जन को प्राथमिकता दें। कार्यक्रम अध्यक्ष प्राचार्य प्रो. के बी सुब्बारायुडु ने कहा कि देवप्रयाग भविष्य में उत्तराखंड की संस्कृत शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। संयोजक डॉ. कृपाशंकर शर्मा ने प्रतिवेद प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में प्रो. बनमाली विशवाल, डॉ. आर. बालमुर्गन, डॉ. प्रफुल्ल गड़पाल, डॉ. अरविद गौर, डॉ. वीरेंद्र बत्र्वाल, डॉ. सुरेश शर्मा, डॉ. दिनेश चन्द्र पांडे, डॉ. नितेश बिष्ट आदि मौजूद थे।
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