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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 20, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

टिहरी झील के हजारों फीट ऊपर हवा में उड़ान भरेंगे खतरों के खिलाड़ी

By BhanuEdited By:
Published: Thu, 20 Oct 2016 12:03 PM (IST)Updated: Thu, 20 Oct 2016 09:43 PM (IST)

टिहरी झील को एशिया के सबसे बड़े सिमुलेशन इंसीडेंट इन वॉल सेंटर बनाने की तैयारी है। पैराग्लाइडिंग विशेषज्ञों ने यहां पर एसआइवी कोर्स की शानदार संभावनाएं जताई।

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नई टिहरी, [अनुराग उनियाल]: हवा में हजारों फीट ऊपर उड़ान भर रहा पैराग्लाइडर अचानक तेजी से जमीन की ओर आने लगे तो कुछ देर के लिए ही सही, दर्शकों की धड़कनें जरूर थम जाएंगी। आने वाले समय में ऐसा ही रोमांच टिहरी झील के ऊपर देखने को मिलेगा।
असल में टिहरी झील को एशिया के सबसे बड़े एसआइवी (सिमुलेशन इंसीडेंट इन वॉल) सेंटर बनाने की तैयारी है। हाल ही में टिहरी झील में पैराग्लाइडिंग करने आए विशेषज्ञों ने यहां पर एसआइवी कोर्स की शानदार संभावनाएं जताई थीं। इसके बाद अब पर्यटन विभाग भी यहां पर एसआइवी कोर्स के लिए योजना बनाने में जुट गया है।

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पैराग्लाइडिंग की रोमांचक दुनिया में एसआइवी कोर्स सबसे अहम माना जाता है। एसआइवी एक फ्रेंच शब्द है, जिसका हिंदी में अर्थ है उड़ान भरने के दौरान किसी दुर्घटना या परेशानी में फंसने पर बचने का प्रशिक्षण।
टिहरी साहसिक पर्यटन महोत्सव में आए पैराग्लाइडिंग कोच एवं उत्तराखंड पैराग्लाइडिंग संघ के सचिव शंकर सिंह बोरा ने बताया कि एसआइवी उड़ान के दौरान खुद को बचाने का प्रशिक्षण है। जो कि देश में फिलहाल हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर और पांग डैम में ही दिया जाता है।


नेपाल के पोखरा में एशिया का सबसे बड़ा एसआइवी सेंटर है। अब पोखरा में एयरपोर्ट बनने के कारण वहां पर ऐसी गतिविधियां कम हो रही हैं। इसका कारण है कि एसआइवी सिर्फ बड़ी झीलों के ऊपर ही हो सकता है।
टिहरी में 42 वर्ग किमी की विशालकाय झील और प्रतापनगर की पहाड़ियां हैं। ऐसे में यहां एसआइवी प्रशिक्षण शुरू किया जाए तो यह एशिया का सबसे बड़ा केंद्र होगा। इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं और विभाग का सहयोग रहा तो अगले वर्ष से एसआइवी प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया जाएगा।

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जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा के मुताबिक पैराग्लाइडिंग एसोशिएशन ने इस बारे में बात की है। पूरा प्रयास रहेगा कि टिहरी में जल्द ही एसआइवी प्रशिक्षण शुरू किया जाए।
यह मिलनी चाहिए सुविधाएं
-एक ही किनारे पर टेक ऑफ और लैंडिंग की सुविधा
-झील पर पुल और बेहतर सड़कों का निर्माण
-टेक ऑफ के लिए पर्याप्त स्थान

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यह होता है एसआइवी में
-जल्द उतरने का प्रशिक्षण
-पैराशूट बंद होने पर दूसरे पैराशूट का प्रयोग
-तबीयत खराब होने पर सुरक्षित लैंडिंग
-हवा में फंसने पर सुरक्षित बाहर आना
-सुरक्षित स्थान पर लैंडिंग

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