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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 26, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rudraprayag Bus Accident: तीन धामों की यात्रा की, नहीं हो सके बदरीविशाल के दर्शन; बचे यात्रियों का रो-रोकर बुरा हाल

Published: Thu, 26 Jun 2025 04:26 PM (IST)Updated: Thu, 26 Jun 2025 04:28 PM (IST)

रुद्रप्रयाग में चारधाम यात्रा पर जा रही एक बस घोलतीन के पास अलकनंदा नदी में गिर गई। यह बस गंगोत्री, ...और पढ़ें

खुशी-खुशी तीन धामों के दर्शन के बाद अत में जा रहे थे बदरीनाथ धाम। जागरण

खुशी-खुशी तीन धामों के दर्शन के बाद अत में जा रहे थे बदरीनाथ धाम। जागरण 

जागरण संवाददाता, रुद्रप्रयाग। तीन धामों की यात्रा तो की, लेकिन बद्रीविशाल के दर्शनों की इच्छा मन में ही रह गई। सुबह हंसी-खुशी बस में बैठे सभी यात्री बद्रीविशाल के दर्शनों को लेकर काफी उत्साहित थे, बस में भजन की कीर्तन भी हो रहा था, लेकिन एकाएक हुई दर्दनाक दुर्घटना के बाद सन्नाटा पसर गया।

इस दुर्घटना में बचे यात्री भी जीते जी सबकुछ खो चुके हैं। किसी ने अपने मां-बाप को खो दिया है तो किसी ने पत्नी, व रिश्तेदारों को। गंभीर रूप से घायल सभी यात्री काफी सहमे हुए हैं। कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं है।

17 जून को राजस्थान के उदयपुर का यह परिवार चारधाम की यात्रा के लिए रवाना हुआ था। गंगोत्री, यमुनोत्री व केदारनाथ धाम के दर्शन करने के बाद दल अब अपनी अंतिम यात्रा पर बदरीनाथ के लिए गुरुवार सुबह रुद्रप्रयाग से निकला।

सभी यात्री समय पर तैयार हो गए और रुद्रप्रयाग में रैंतोली स्थित होटल से नाश्‍ता करने के बाद सभी खुशी खुशी भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए बस में बैठे। अनहोली से अनजान सभी यात्रियों के चेहरे पर खुशी थी। बस का माहौल काफी खुशनुमा था। बाबा केदार के दर्शन के बाद सभी के मन में अब बदरीनाथ के दर्शनों की इच्छा थी।

गाड़ी में भजन कीर्तन भी हो रहा था। लेकिन पलक छपकते ही खुशियां मातम में छा गई। रुद्रप्रयाग से बस को चले हुए एक घंटा भी नहीं हुआ था कि घोलतीन के पास बस सीधे अलकनंदा नदी में समा गई। बस में बैठे यात्री कुछ समझ ही नहीं पाए और नौ यात्री लापता हो गए, जबकि तीन की मृत्यु हो गई। जो खुशनसीब रहे, वह बस से छटक गए, तीन गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि चार का उपचार रुद्रप्रयाग में ही चल रहा है।

दुर्घटना के बाद जिंदगी की जंग जीतने वालों की निगाहे अपनों को खोजती रही, और यहां का माहौल काफी गमगीन हो गया। अपनों से बिछड़ने वाले परिजनों का रो-रोक कर बुरा हाल हो गया। कई तो उफलती नदी में जाने को तैयार हो गए, स्थानीय लोगों के समझाने के बाद ही वह माने।

दस वर्षीय घायल पार्थ भी भगवान बद्रीविशाल से कहता रहा कि हम तो दर्शनों को आए थे, लेकिन हमारे साथ ऐसा क्यों किया, हम तो तेरे भक्त थे। मां पिताजी तो सुबह शाम पूजा करके हमेशा खुश शांति की कामना करते थे।

घायल विशाल सोनी भी दुर्घटना के बाद से काफी सहमे हुए हैं कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं। रोते-रोते ये जरूर कह रहे थे कि भगवान हम तो भक्त थे और हमारे साथ ही यह अन्याय कर दिया। यह कैसा इंसाफ है। सभी घायलों की आंखों में दुर्घटना का खौफ साफ देखा जा सकता था।