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    भारत की नागरिकता लेने के बाद ही चुनाव लड़ सकती है नेपाल से ब्याह कर लाई बहू

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 27 Sep 2019 11:00 PM (IST)

    संवाद सूत्र झूलाघाट नेपाल से ब्याह कर लाई गई बहू भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद ही पंच

    भारत की नागरिकता लेने के बाद ही चुनाव लड़ सकती है नेपाल से ब्याह कर लाई बहू

    संवाद सूत्र , झूलाघाट: नेपाल से ब्याह कर लाई गई बहू भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद ही पंचायती चुनाव लड़ सकती है। तब तक मताधिकार भी नहीं कर सकती है। दूसरी तरफ नेपाल से घुसपैठ कर ग्राम पंचायत में अनिधकृत रू प से रह रहे लोगों के नाम अभी तक अभिलेखों से नहीं हटे हैं। जिसे लेकर नेपाल सीमा से लगे मजिरकाडा ग्राम पंचायत में यह मामला तूल पकड़ने लगा है।

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    पंचायत चुनाव चल रहे हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देश के तहत कोई भी नेपाल से ब्याह कर लाई गई बहू भारतीय नागरिकता नहीं मिलने तक चुनाव नहीं लड़ सकती है। जिसका सीधा तात्पर्य वह मताधिकार का प्रयोग भी नहीं कर सकती है। इसी क्रम में एक नामांकन भी नेपाली मूल होने के कारण जांच के बाद निरस्त कर दिया गया है। दूसरी तरफ नेपाल से लगे विकास खंड मूनकोट के मजिरकांडा ग्राम पंचायत में नेपाल से आकर ग्राम पंचायत में बस चुके लोगों का मामला जोर पकड़ने लगा है। नेपाल से भारत आकर ग्राम पंचायत के अभिलेखों में नाम दर्ज करा चुके नेपाली मूल के लोगों के मतदान को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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    वर्ष 2003 -04 में चिन्हित होने के बाद चल रही है जांच

    झूलाघाट: नेपाल से ब्याह कर लाई गई बहू के भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद ही चुनाव लड़ने के निर्देशों को लेकर मजिरकांडा ग्राम पंचायत में एक नई बहस प्रारंभ हो चुकी है। नेपाल सीमा पर लगा झूलाघाट कस्बा मजिरकांडा ग्राम पंचायत में आता है। जहां पर पूर्व से ही नेपालियों के भारत में आकर बसने और ग्राम पंचायत के अभिलेखों में उनके नाम दर्ज होने का मामला सुर्खियों में रहा है। जिसे लेकर वर्ष 2003-04 में भारतीय बने कतिपय नेपाली नागरिक चिन्हित कर दिए गए। ग्राम पंचायत में अनधिकृत ढंग से रह रहे नेपालियों के मामले की जांच वर्ष 2015 से चल रही है।

    इस संबंध में मजिरकांडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर भट्ट बताते हैं कि 15 वर्ष पूर्व चिन्हित और चार वर्ष पूर्व से हो रही जांच के बाद भी अनधिकृत ढंग से रह रहे नेपाली लोगों के नाम राजनीतिक दबाव से नहीं हटाए गए हैं। ऐसे लोग बेरोकटोक तब से हुए सभी चुनावों में मतदान कर रहे हैं। जबकि नियमानुसार उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं है। वह बतात हैं कि वर्ष 2015 में अवैध ढंग से रह रहे नेपाली लोगों के मामले को जिला प्रशासन के सम्मुख उठाया गया और ठोस प्रमाण भी उपलब्ध करा दिए थे। मामले की उच्च स्तर पर जांच चल रही है।

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    परिवार रजिस्टर नहीं हो सका ऑनलाइन

    मजिरकांडा ग्राम पंचायत में नेपालियों वाले मामले के कारण परिवार रजिस्टर ऑनलाइन नहीं हो सका है। जिले की अन्य ग्राम पंचायतों में परिवार रजिस्टर ऑनलाइन हो चुके हैं। मजिरकांडा का परिवार रजिस्टर इस मामले को लेकर विकास खंड कार्यालय से ऑनलाइन नहीं किया गया है। जिससे ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल निकालने में भी परेशानी हो रही है।

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    घुसपैठियों के मतदान पर रोक की मांग

    ग्रामीणों का कहना है कि जब ब्याह कर लाई गई बहू नागरिकता नहीं मिलने तक मताधिकार से वंचित है तो घुसपैठिए कैसे मतदान कर सकते हैं। जिसे लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से इस बार मतदान पर रोक लगाने की मांग की है। निर्वाचन आयोग से इस मामले को संज्ञान में लेने की मांग की है।