सोर घाटी में आज से मचेगी लोक पर्व सातूं-आठूं की धूम

संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़: सीमांत जिले पिथौरागढ़ का लोक पर्व सातूं-आठूं आज से शुरू होगा। जिलेभर में गौरा और महेश्वर की विधि विधान से पूजा अर्चना होगी। गांवों में खेल, ठुलखेल लगाए जाएंगे। जिला मुख्यालय में आज से पांच दिवसीय आठूं महोत्सव भी शुरू होगा। लोक मान्यता है कि भौदा मास की सप्तमी को गौरा (मां पार्वती) अपने मायके यानी हिमालय में आती हैं। गांवों में लोग उनका स्वागत करते हैं। अष्टमी को महेश्वर (भगवान शंकर) उन्हें वापस लेने आते हैं। सातूं-आठूं पर्व की शुरुआत पंचमी से मानी जाती है। इस दिन पंच अनाज भिगाये जाते हैं। जिनका प्रसाद बनाकर गौरा और महेश्वर को भोग लगाया जाता है। प्रतीकात्मक रूप में सातूं के दिन गमरा की प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। अगले रोज भगवान महेश्वर की प्रतिमा की स्थापना कर गौरा महेश्वर का विवाह कराया जाता है। अगले रोज प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। सीमांत जिले के गांवों में लोक पर्व को लेकर बेहद उत्साह है। सोर घाटी के गांवों में महिलाओं ने पर्व को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिला मुख्यालय के रामलीला मैदान में गुरुवार को आठूं महोत्सव शुरू होगा। पितरौटा गांव की महिलाएं गौरा की झांकी लेकर रामलीला मैदान में पहुंचेगी। देर सायं खेल, ठुलखेलों का आयोजन होगा। आयोजन पांच दिनों तक चलेगा।

Edited By: Jagran

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