संवाद सूत्र, मुनस्यारी: सरकारें चीन सीमा तक सड़क बनाने के दावा कर रही हैं, परंतु धरातल पर खेले जा रहे खेल के चलते चीन सीमा तक वाहन चलने का सपना अभी दूर नजर आ रहा है। दस वर्ष से निर्माणाधीन धापा- मिलम मार्ग निर्धारित अवधि पूरा करने के उपरांत भी अभी मात्र 20 किमी ही बन सकी है। इधर तहसील प्रशासन की हेकड़ी से निर्माण कर रही कंपनी ने काम रोक दिया है।

मुनस्यारी के धापा से विश्व प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर तक 71 किमी सड़क स्वीकृत है। इस सड़क को 2015 तक पूरा होना था। इस वर्ष के आठ माह गुजर चुके हैं। सड़क धापा से 12 किमी दूर जिमीघाट और मिलम से 8 किमी बुगडियार तक बनी है। 51 किमी सड़क का निर्माण होना है। बीआरओ द्वारा बनाई जा रही इस सड़क का निर्माण एडीसीआइ इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी करवा रही है।

सड़क निर्माण में विलंब का कारण बीआरओ और निर्माण कंपनी के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण भी रहे हैं। सड़क को लेकर ग्रामीणों ने कई वर्षो तक व्यवधान डालने का कार्य किया। बमुश्किल सड़क धापा से जिमीघाट तक 20 किमी बनी तो अब तहसील प्रशासन का डंडा चलने लगा है। धापा से जिमीघाट तक 20 किमी सड़क का अक्टूबर माह में डामरीकरण होना था। इधर, पटवारी दीपा जोशी द्वारा कंपनी को बिना तिथि का एक नोटिस भेज दिया है। इस नोटिस में बीआरओ और कंपनी पर पत्थरों की रॉयल्टी जमा नहीं करने का आरोप लगाया है। जिसे लेकर कंपनी ने कार्य रोक दिया है।

इस संबंध में बीआरओ के अधिकारी ताहिर खान का कहना है कि सड़क निर्माण में पत्थरों की रॉयल्टी के लिए 8 लाख 93 हजार की धनराशि देहरादून में पूर्व में ही जमा कर दी गई थी। तहसील प्रशासन के पत्र से आश्चर्य हुआ है। रॉयल्टी एक ही बार जमा होती है।

इस संबंध में तहसीलदार खुशाल राम आर्य का कहना है कि उन्हें नोटिस जारी होने की कोई जानकारी नहीं है। कानूनगो हरीश राम का कहना है कि रॉयल्टी जमा नहीं होने के कारण नोटिस भेजा गया है। प्रभारी उपजिलाधिकारी जयभारत सिंह के उपलब्ध नहीं होने से उनसे संपर्क नहीं हो पाया। एक बार रॉयल्टी जमा होने के बाद दोबारा रॉयल्टी के लिए तहसील प्रशासन के निर्देश पर बिना तिथि का नोटिस जारी होने से कंपनी ने काम करना बंद कर दिया है।

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