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    Possitive India: गांव में वापस लौटने के बाद युवा अपना रहे रोजगार के नए साधन

    By Bhanu Prakash SharmaEdited By:
    Updated: Wed, 29 Apr 2020 11:12 AM (IST)

    लॉकडाउन के दौरान विभिन्न राज्यों और जनपदों से वापस घर लौटे युवा अब गांवों में भी रोजगार के साधन खोज रहे हैं। कई युवाओं ने तो गांव में रहने का ही मन बना लिया है।

    Possitive India: गांव में वापस लौटने के बाद युवा अपना रहे रोजगार के नए साधन

    कोटद्वार, अजय खंतवाल। लॉकडाउन के दौरान विभिन्न राज्यों और जनपदों से वापस घर लौटे युवा अब गांवों में भी रोजगार के साधन खोज रहे हैं। कई युवाओं ने तो गांव में रहने का ही मन बना लिया है। इससे गांवों में रौनक लौटने लगी है।  

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    पौड़ी जिले के नैनीडांडा ब्लॉक स्थित ग्राम नाला निवासी सतेंद्र सिंह बीते बारह वर्षों से दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्य कर रहे थे। कोरोना संक्रमण फैला तो पहाड़ के अन्य प्रवासियों की तरह वह भी अपने गांव वापस लौट आए। घर वापसी के दौरान ही सतेंद्र ने फैसला कर लिया था कि अब वापस दिल्ली लौटने के बजाय गांव में कोई स्वरोजगार अपनाएंगे। इस निर्णय पर अमल करते हुए उन्होंने गांव लौटने के अगले दिन ही बीस बकरियां खरीदीं और अपनी नई जिंदगी को संवारने में जुट गए।

    यह महज सतेंद्र की ही दास्तान नहीं है, विभिन्न शहरों से वापस लौटे अन्य युवा भी उन्हीं की तरह स्वरोजगार शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि यदि गांवों में वापस लौटे 10-15 प्रतिशत युवा भी स्वरोजगार की डगर अपनाते हैं तो पलायन के चलते वीरान पहाड़ में रंगत लौटना तय है। 

    उत्तराखंड में पलायन की सबसे अधिक मार पौड़ी जिले पर ही पड़ी है। वर्ष 2011 के बाद पौड़ी जिले की 1212 ग्राम पंचायतों में से 1025 ने पलायन की सर्वाधिक मार झेली। उत्तराखंड पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 186 गांव और तोक (उप गांव) पूरी तरह मानवरहित हो गए। 112 तोक, गांव या मजरों की आबादी आधी रह गई। 

    देश में कोरोना महामारी के पैर पसारने के बाद बड़े पैमाने पर गांवों से पलायन कर चुके लोगों ने घर वापसी की है। 20 मार्च से अभी तक जिले में 12 हजार से अधिक लोग अपने घरों को लौटे हैं। इनमें से अधिकांश प्रवासी अब वापस शहरों का रुख न करने का मन बना रहे हैं। जाहिर है वो भविष्य के लिए भी कोई-न-कोई योजना जरूर बना रहे होंगे।

    ऐसे ही एक ग्रामीण हैं ग्राम खेतू निवासी गणोश पोखरियाल। बीते 30 वर्षो से साहिबाबाद (उत्तर प्रदेश) में रह रहे गणोश अब लॉकडाउन खुलते ही घर वापसी की तैयारी में हैं। गणोश कहते हैं कि घर से दूर रहकर मेहनत करने के बजाय यदि घर पर रहकर ही स्वयं के लिए मेहनत की जाए तो सफलता मिलनी तय है।

    स्वरोजगार शुरू करने का सुनहरा मौका

    सुधीर बताते हैं कोरोना महामारी के चलते घर वापस लौटे युवाओं के पास घर से ही स्वरोजगार शुरू करने का सुनहरा मौका है। अच्छी बात यह है कि वर्तमान परिस्थितियों में घर वापस लौटे युवाओं में दस से पंद्रह फीसद स्वरोजगार का मन बना चुके हैं।

    सुधीर सिखा रहे स्वरोजगार के गुर

    चौबट्टाखाल तहसील के ग्राम डबरा निवासी सुधीर सुंद्रियाल घर वापस लौटकर स्वरोजगार शुरू करने वालों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। दिल्ली में अच्छी-खासी नौकरी छोड़ गांव वापस लौटे सुधीर ने वर्ष 2015 में सामूहिक सहभागिता से क्षेत्र की तस्वीर बदलने को प्रयास शुरू किए। आज वह क्षेत्र के करीब 20 गांवों में 300 से अधिक परिवारों को अपनी मुहिम से जोड़ चुके हैं। 

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    सुधीर बताते हैं कि वह कृषि, शिक्षा, जल संरक्षण व संस्कृति संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहे हैं। बंजर खेतों को आबाद किया जा रहा है, संस्था से जुड़े पढ़े-लिखे युवा गांव में नौनिहालों को शिक्षित कर रहे हैं। ग्रामीणों को जल का महत्व समझाते उनसे गांव में तालाब खुदवाए जा रहे हैं।

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