पौड़ी, जेएनएन। पौड़ी जिले के कोट विकासखंड के कोट गांव में लॉकडाउन के परिणाम उम्मीद जगाने वाले रहे हैं। इस अवधि में गांव की महिलाओं ने अपने वर्षो से बंजर पड़े खेतों को आबाद करने की मुहिम शुरू की और अब तक वह दर्जनभर खेतों को आबाद कर चुकी हैं। इन खेतों में अंकुरित हो आए सब्जियों के बीज न केवल भविष्य के लिए उम्मीद जगा रहे हैं, बल्कि गांव लौट रहे प्रवासियों को भी जीवन की नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। 

लॉकडाउन के चलते व्यावसायिक गतिविधियां ठप रहने से लोगों की आर्थिकी बुरी तरह प्रभावित हुई है। संकट के इस दौर में भी कोट गांव की महिलाओं ने भविष्य को दिशा दिखाने वाली पहल शुरू की है। इसके लिए उन्होंने गांव के बंजर खेतों का चयन किया और अब तक एक दर्जन से अधिक खेतों को आबाद कर चुकी हैं। 

महिलाओं ने इन खेतों में सब्जियों के बीच बोये हैं। खास बात यह कि खेती के कार्य में महिलाएं शारीरिक दूरी का अनिवार्य रूप से पालन कर रही हैं। महिला मंगल दल से जुड़ीं अनीता देवी, हेमंती देवी व संगीता देवी बताती हैं कि बंजर खेतों को आबाद करने के लिए ग्राम प्रधान रीना रौथाण और समर्थ धर्मा लाइफ फाउंडेशन की प्रचारक प्राची ने उन्हें प्रेरित किया। 

उन्हीं की मदद से सब्जियों के बीज भी उपलब्ध हुए। बताया कि अब उनका ध्यान उत्पादों को जंगली जानवरों से बचाने पर है। इसके लिए खेतों के चारों ओर बाड़ लगाई जाएगी। ग्राम प्रधान रीना रौथाण कहती हैं कि वर्तमान हालात में खेती ही स्वरोजगार का सबसे मजबूत जरिया है। नए तरीके से खेती कर महिलाएं आर्थिक रूप से तो मजबूत होंगी ही, पहाड़ को भी नई दिशा मिलेगी। 

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गांव की ये महिलाएं कर रही हैं खेती 

अनीता देवी, हेमंती देवी, संगीता देवी, सविता देवी, किरन देवी, ऊषा नेगी, रघुनथी देवी, सरोजनी, पूजा, लक्ष्मी, बबीता, सतेश्वरी, सीमा, रेखा, अनीता, रामेश्वरी, कविता, बीना, दिव्या नेगी, कुसुमा, रीना, अनीता देवी, पन्नू देवी व गीता देवी।

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