इस 'विजय' की कहानी पढि़ए, यकीन मानिए हार का मुंह नहीं देखना पड़ेगा
बीएससी कर रहे विवेक गरीबी का दर्द जानते हैं। उनके पास बच्चों को देने के लिए धन तो नहीं, लेकिन वो जज्बा और हिम्मत जरूर है जिसके भरोसे वह यहां तक पहुंचे हैं।
रुद्रपुर, बृजेश पांडेय : बीएससी कर रहे विवेक गरीबी का दर्द जानते हैं। उनके पास बच्चों को देने के लिए धन तो नहीं, लेकिन वो जज्बा और हिम्मत जरूर है जिसके भरोसे वह यहां तक पहुंचे हैं। वह मुफलिसी में जी रहे बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते हैं, स्कालरशिप दिलाते हैं, नवोदय आदि जैसी परीक्षाओं की तैयारी भी कराते हैं। उनकी कोशिशों से ही अब तक 80 बच्चों का विभिन्न परीक्षाओं में चयन भी करा चुका है।
विवेक भदईपुरा के रहने वाले हैं। बेहद निर्धन परिवार से ताल्लुक रखने वाले विवेक के पिता मेहनत मजदूरी करते हैं। आठवीं पास करने पर विवेक को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सब्जी का ठेला तक लगाना पड़ा। लेकिन इतने से काम नहीं चला तो भोर संस्था के संपर्क में आए। यह संस्था प्रवेश परीक्षा के बाद बच्चों को निशुल्क ट््यूशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराती है। विवेक ने यह परीक्षा पास कर उसमें प्रवेश ले लिया। इतना ही नहीं, इसके बाद ठान लिया कि जब संस्था लोगों को मुफ्त शिक्षा दे सकती है तो वह क्यों नहीं। कक्षा नौवीं में पढ़ते हुए विवेक ने निर्धन परिवार से ताल्लुक रखने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया।
धीरे-धीरे कक्षा पांचवीं के ऊपर कक्षा वाले छात्रों को प्रतिस्पर्धात्मक तैयारियां भी कर आने लगे। इसके लिए वह घर घर जाकर ऐसे बच्चों का चयन करते, जो पढ़ाई को लेकर इच्छुक थे उन्हें चुनकर पढाना शुरू किया। यह क्रम आगे बढ़ता गया और अब तक विवेक करीब 80 बच्चों का चयन नेशनल टैलेंट सर्च, आस्था संस्थान, नवोदय विद्यालय सहित अन्य में करा चुके हैं।
ये है पारिवारिक पृष्ठभूमि
विवेक घर के इकलौते बेटे हैं। छोटी बहन ममता को भी नेशनल टैलेंट सर्च की परीक्षा में उन्होंने सफलता दिलाई। विजय कहते हैं कि इसके लिए आमजन को भी सामने आना चाहिए। विवेक ने 2013 में एनटीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। बताते हैं कि जब वह 9वीं में थे तबसे अब तक करीब 400 से ऊपर छात्रों को पढ़ा चुके हैं। वही वर्तमान में 60 बच्चों को नवोदय विद्यालय, नेशनल टैलेंट सर्च, भोर संस्थान आदि की परीक्षा देने दिलाया है। जिनके परिणाम अभी आने बाकी हैं।
पिता को लगा था अनपढ शब्द का आघात
विवेक के पिता पप्पू ने बताया कि जब विवेक कक्षा दो में थे, उस दौरान वे रामपुर किसी काम के सिलसिले में गए। वहां पता पूछने पर किसी अनजान व्यक्ति ने अनपढ़ कहकर उन्हें अपमानित किया। इस घटना के बाद उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने की ठान ली, साथ ही बच्चों को भी दूसरों की मदद के लिए प्रेरित भी किया।
प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें भी खुद देते हैं
विवेक ऐसे बच्चों को स्वयं पुस्तक भी पढ़ाई के लिए देते हैं, जो पुस्तक खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इनमें गणित, सामन्य ज्ञान सहित अन्य विषय की पुस्तकें शामिल हैं।
निकालते हैं बच्चों के लिए खास प्रश्न
विवेक सैट-मैट के सिलेबस और अन्य पब्लिकेशन की पुस्तकों से मिलान कर विशेष नोट््स तैयार करते हैं। जिससे बच्चों को पढ़ाते हैं। कक्षा एक से 12वीं तक के छात्रों को शिक्षा देते हैं।
क्या कहते हैं विवेक के स्टूडेंट्स
आठवीं में विवेक सर ने एनटीएसई की परीक्षा के बारे में बताया, साथ ही तैयारी कराई। इनके बताए गए प्रश्न और सिलेबस सटीक थे। जिसके चलते परीक्षा में पास हुई। तीन से पांच बार छात्रवृत्ति मिल चुकी है।
- पिंकी, भदईपुरा
निर्धन परिवार के बच्चों के लिए विवेक सर काफी मददगार हैं। उनसे काफी प्ररणा मिली है। प्रतियोगी परीक्षा में उत्तीर्ण हुई, जिससे स्कालरशिप मिल रही है। इसके अलावा वर्तमान में बीएससी की पढ़ाई कर रही हूं।
- गुलनाज, भदईपुरा
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