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    Sanskarshala Haldwani : इंटरनेट मीडिया के आधार पर किसी के प्रति राय बनाना समझदारी नहीं

    By Himanshu JoshiEdited By: Skand Shukla
    Updated: Sat, 15 Oct 2022 03:10 PM (IST)

    इंटरनेट मीडिया का हमारी जिंदगी में दखल काफी बढ़ गया है। बच्चे हो या बड़े अधिकतर इसी के आधार पर लोगों के प्रति राय बनाने के साथ अपना आदर्श भी बना रहे हैं। जबकि कई बार हकीकत कुछ और ही निकलती है।

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    Sanskarshala Haldwani : र्पण पब्लिक स्कूल कुसुमखेड़ा में पढ़ी गई संस्कारशाला पर आधारित कहानी

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : इंटरनेट मीडिया का हमारी जिंदगी में दखल काफी बढ़ गया है। बच्चे हो या बड़े अधिकतर इसी के आधार पर लोगों के प्रति राय बनाने के साथ अपना आदर्श भी बना रहे हैं। जबकि कई बार हकीकत कुछ और ही निकलती है। इसलिए समझदारी इसी में है कि इंटरनेट मीडिया के आधार पर किसी के प्रति राय न बनाई जाए। कुसुमखेड़ा स्थित दर्पण पब्लिक स्कूल में शिक्षिका ममता जोशी ने कहानी पढ़ी और बच्चों से प्रश्नोत्तर किए।

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    उन्होंने कहानी को लेकर कहा कि सोनू इंटरनेट मीडिया पर रमेश अंकल से जुडऩे के बाद उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हो गया था। उनके पहनावे, सुंदर स्टेटस और तस्वीरें साझा करना, इस सब के आगे उसे अपने पिता अजय का व्यक्तित्व फीका लगता था। रमेश अंकल उसके स्कूली मित्र मोहन के पिता थे। जो उनके स्कूल में आयोजित होने वाली भाषण प्रतियोगिता में आने वाले थे।

    इसलिए उनसे मिलने को लेकर सोनू खासा उत्साहित था, लेकिन जब वह उनसे वास्तविकता में मिला तो उसे सदमा लग गया। दैनिक जागरण संस्कारशाला में बिना सोचे समझें न करें विश्वास से प्रकाशित सोनू की कहानी इसी समस्या पर केंद्रित है। शिक्षिका ने कहानी की सीख समझाई। बच्चों ने कहा कि इंटरनेट मीडिया के आधार पर किसी के प्रति राय नहीं बनाना चाहिए। जिसे एक फिल्म का किरदार समझना ही उचित है।

    संस्कारशाला के माध्यम से मैं दैनिक जागरण की इस अनूठी पहल का स्वागत करती हूं। इसमें प्रकाशित शिक्षाप्रद कहानियां न केवल बच्चों में कहानी, कला के प्रति रुचि जागृत करेंगी, बल्कि उन्हें संस्कारवान भी बनाएंगी।

    - प्रेमा बिष्ट, शिक्षिका

    बदलते समय में लोग संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। सामाजिक मूल्यों का पतन हो रहा है। सोनू की कहानी सिखाती है कि किस प्रकार हम कई बार अपना आदर्श गलत चुन लेते हैं। दैनिक जागरण का प्रयास सराहनीय है।

    - दीपा शाही, शिक्षिका

    संस्कारशाला की कहानी से यही सीख मिलती है कि गैजेट्स का प्रयोग सिर्फ जरूरी कार्य के लिए करना आवश्यक है, इसका ज्यादा प्रयोग नुकसानदायक है। इसके आधार पर किसी के प्रति राय नहीं बनाना चाहिए।

    - रुचि अधिकारी, छात्रा

    दैनिक जागरण संस्कारशाला में प्रकाशित कहानियां रोचकता के साथ सामाजिक सीख देने वाली होती हैं। इनसे बहुत कुछ सीखने और समझने को मिलता है। कहानी को हम अपने परिवार और दोस्तों को भी सुनाते हैं।

    -आयुष कुमार, छात्र