हल्द्वानी, गोविंद बिष्ट : रात 8.40 बजे रेलवे स्टेशन काठगोदाम। 15014 रानीखेत एक्सप्रेस ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़ी है। ट्रेन में फटाफट चढ़ते लोगों के बीच अपनी सीट पर बैठने की होड़ मची थी। परिवार के साथ सफर करने वालों को जल्दी ज्यादा थी। यात्री बार-बार अपना टिकट देख उसमें दर्ज सीट तलाश रहे थे। अब ट्रेन के चलने में पांच मिनट का समय शेष था। सभी अपनी-अपनी सीट पर बैठते ही तुरंत आराम की मुद्रा में आ गए। हालांकि कुछ अब भी दाएं-बाएं घूमने में मशगूल थे। वहीं भीड़भाड़ के बावजूद बड़ों संग सफर कर रहे बच्चों ने खेलने के लिए जगह निकाल ही ली।

इस बीच शुरू होती है चुनावी चर्चा। दोस्तों के साथ दिल्ली का सफर कर रहे हल्द्वानी के आरिफ सिद्दीकी पूछते ही कहने लगे कि शिक्षा की कोई बात नहीं करता। गरीब अपने बच्चों को पढ़ाए तो कैसे। निजी स्कूलों की महंगी फीस, डे्रस व किताबों पर लगाम कसने के वादे कब पूरे होंगे। इस बीच चर्चा को सुन रहे अमृतपुर निवासी गिरीश चंद्र पंत ने तपाक से बोल पड़े पिछले पांच साल में काम तो हुआ है। लेकिन स्थानीय मुद्दे पूरे होने बाकी है। जब उस स्थानीय मुद्दा पूछा तो बोल पड़े..कब बनेगा जमरानी बांध?। अगर यह बांध नहीं बना तो भविष्य में हल्द्वानी से लेकर तराई तक के लोग पानी को तरसेंगे। यूपी की सिंचाई जरूरत भी तो इस बांध के पानी से पूरी होनी थी। लिहाजा परिणाम आते ही सांसद से खुद मिलकर इस मुद्दे को उठाएंगे। वहीं पीछे से बचकर निकल रहे एक सज्जन बड़बड़ाते हुए कहने लगे भईया..हल्द्वानी में फ्री होल्ड पूरी तरह कब लागू होगा। बनभूलपुरा में रहने वाली 40 हजार की आबादी की परेशानी कब खत्म होगी। इस बीच अपने पिता के साथ दिल्ली जा रही पिथौरागढ़ की अंजलि काफी देर से चुपचाप सभी की बातें सुन रही थी।

जब उसे पता चला कि टीम जागरण चुनावी मुद्दों की नब्ज टटोलने पहुंची तो बोल उठी बच्चियों की शिक्षा पर जोर देना चाहिए। पहाड़ में स्कूल तो बना दिए मगर शिक्षक तो भेजो। ताकि पढऩे के लिए शहरों की दौड़ न लगानी पड़ी। अब कुछ ओर लोग भी अपनी बात रखने का मन बनाने लगे। तभी टीटी की एंट्री हो जाती है। अब सब टिकट बाहर निकालने में लग जाते हैं। वहीं पीछे से आए पांच-छह युवाओं की टोली राहुल से लेकर मोदी तक को जिताने की बात कहकर निकल पड़ी। अब जनरल बोगी से एसी कोच का रूख करना पड़ता है। मुलाकात होती है हल्द्वानी की दो शिक्षिकाओं राखी कपिल व सुनीता पांडे से। जो तपाक से बोल पड़ती है भईया सेना का मान बढ़ा है। विंग कमांडर अभिनंदन सकुशल लौटे, हमारे सामने चीन व अमेरिका भी झुक रहा है। कोई तो है जो सेना व उसके सम्मान के लिए सोच रहा है। बेरोजगारी समेत अन्य समस्याएं है। पूरी उम्मीद है कि नई सरकार इनका हल जरूर निकालेगी। अब बारी स्लीपर कोच के यात्रियों की आती है।

यहां दिल्ली के एक व्यापारी लोकेश गुप्ता अपने पूरे परिवार के साथ सफर कर रहे थे। सब खाना खाने में मशगूल थे। लेकिन चर्चा शुरू करते ही सीधा बोले कि कारोबारी होने के बावजूद जीएसटी से फायदा हुआ है। अब सरकार को शिक्षा से लेकर अन्य बड़े मुद्दों पर काम करने के साथ लोगों को जागरूक करना पड़ेगा। बोले दिल्ली में प्रदूषण व ट्रैफिक बड़ा मुद्दा है। लेकिन यहां नैनीताल में इन दोनों समस्याओं से राहत है। इस बीच बच्चे बोल पड़ते हैं कि मुद्दों की कोई कमी नहीं। बस देखना होगा कि विजन व जज्बा किसके पास है। बड़ों से ज्यादा इनके भीतर राजनीति को लेकर रूचि ज्यादा दिखी। इनके संग चर्चा ने एक युवा मन का एक रूझान भी दिया। बोले, जिसका नेता या दल का विजन स्पष्ट होगा वहीं परिवर्तन भी लाएगा। अब करीब एक घंटे से अधिक हो गया और रुद्रपुर स्टेशन आ चुका था। तभी खिड़की की सीट पर बैठे 70 साल के बुजुर्ग बोल उठे बेटा सबने सोच लिया है कि किसी जिताना है। इशारों में समझ जाइए, सीधा नहीं बताएंगे। ट्रेन के पहिए धीरे-धीरे थमे और हमारा इलेक्शन एक्सप्रेस का सफर भी खत्म हो गया। मगर जनता का मूड देखकर लग रहा है कि दिल्ली एवं जैसलमेर तक चुनावी बयार थमने वाली नहीं है।

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Posted By: Skand Shukla

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