उत्तराखंड में वन भूमि पर भू-माफिया का कब्जा, बिजली-पानी की सुविधा के साथ ही आधार कार्ड भी बना
रामनगर के वन ग्राम पुछड़ी में 2011 के बाद वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ, जिसमें अधिकारियों की लापरवाही और भू-माफिया की मिलीभगत सामने आई।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जासं, रामनगर। वन ग्राम पुछड़ी में सबसे ज्यादा बदलाव वर्ष 2011 के बाद आना शुरू हुआ। हालांकि पहले भी यहां अतिक्रमण था, लेकिन वह केवल खेती के रूप में ही था। वर्ष 2011 के बाद खेती वाली वन भूमि में भवन बनने शुरू हुए तो देखते ही देखते इन 15 वर्षों में कई गुना बसासत जंगल की भूमि में हो गई।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के रामनगर रेंज के अंतर्गत पुछड़ी आरक्षित क्षेत्र में तत्कालीन वनाधिकारियों व उस क्षेत्र के वन कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते जमीन पर अतिक्रमण होता चला गया।
वन विभाग को करनी पड़ी रही मेहनत
यदि उस समय ही संबंधित क्षेत्र के वन कर्मी अतिक्रमण नहीं होने देते अपने डयूटी के प्रति निष्ठा दिखाते तो अब जो यह इतनी मेहनत वन विभाग को करनी पड़ी रही है। पुलिस प्रशासन व अन्य संसाधनों पर पैसे का खर्चा हो रहा है, वह नहीं होता।
इसके लिए उस समय के प्रभागीय वनाधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी व कर्मचारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं। वर्ष 2011 के बाद वन विभाग की खेती के लिए कब्जा की हुई भूमि पर भू माफिया सक्रिय हुए ओर जमीन स्टांप व सादे कागज पर बिकती चली गई। बताया जाता है कि जंगल की जमीन की खुली लूट हुई तो बिहार, उप्र. के रामपुर, मुरादाबाद, स्वार आदि क्षेत्रों व रामनगर के मोहल्ला खताड़ी के लोग यहां आकर बसना शुरू हो गए। जिसमें अधिकांश मुस्लिम वर्ग से थे।
यहां बिजली, पानी के साथ ही उन्हें आधार कार्ड तक की सुविधा मिल गई। इस जमीन को स्टांप में बेचने वाले भू माफिया ने वन विभाग की लापरवाही की मदद से खूब पैसा बनाया। लेकिन इन भू माफिया के झांसे में आकर जमीन खरीदने वाले लोगों के लिए अब परेशानी खड़ी हो गई है। उन्होंने अपनी खून पसीने से कमाया पैसा यहां लगाया और आज बेघर हो चुके हैं।
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