रामनगर अतिक्रमण: लोगों में गुस्सा, 'जब झोपड़ी बनाई उसी समय रोक देता वन विभाग तो आज यूं बेघर नहीं होते हम'
रामनगर के पुछड़ी क्षेत्र में वन विभाग द्वारा घर तोड़े जाने से बेघर हुए लोग आक्रोशित हैं।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, रामनगर। पुछड़ी क्षेत्र में जिन लोगों के आशियाने टूटे वह निशब्द हैं और भविष्य को लेकर चिंतित भी। पीड़ित कार्रवाई से ज्यादा वन विभाग के उस समय के अफसर व संबंधित क्षेत्र के वनकर्मी से काफी नाराज नजर आए। उनका साफ कहना था कि उनके पक्के मकान एक दिन में ही नहीं बन गए।
पहले हमने झोपड़ी बनाई फिर पक्का लिंटर डाला। आरोप लगाया कि तत्कालीन वनकर्मी आते थे और पैसे लेकर चले जाते थे। यदि वह उसी समय हमें अतिक्रमण करने से रोक देते तो आज हमारा पैसा बर्बाद नहीं होता। किश्ते लेकर मेहनत मजदूरी कर एक एक पैसा जोड़ा और आशियाना सिर छिपाने लायक बनाया था।
दो लाख रुपये में ताहिर से जमीन खरीदी थी। किसी तरह घर बनाया। अब घर वन विभाग ने तोड़ दिया है। यहीं खताड़ी से आकर रहने लगे थे। घर टूटने से काफी नुकसान हो गया। हमारी किसी ने नहीं सुनी। - चुन्नी बेगम
नौ साल पहले पुछड़ी नई बस्ती गांव में आकर बसे थे। अब आराम से रहेंगे यही सोचकर यहां आकर बस गए थे। क्या पता था कि मेहनत से पाई पाई जोड़कर बनाया गया घर टूट जाएगा। - मन बहादुर
जब हम झोपड़ी बना रहे थे, वन विभाग को उसी समय हमें आकर रोक देना चाहिए था। यदि उसी समय मना कर देते तो आज हम इस तरह खुले आसमान के नीचे बच्चों को लेकर नहीं बैठे होते। -फरजाना
तीन साल पहले शादी होकर मैं इस गांव में आई थी। उसी समय वन विभाग ने क्यों नहीं रोका। अब घर टूट गया तो अपना सामान लेकर यहां से जा रहे हैं। किराए के लिए भी अब कहीं कमरा देखना पड़ेगा। - मेराज
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