पुछड़ी में नेताओं का बिगड़ सकता है वोट का समीकरण
रामनगर के पुछड़ी नई बस्ती में अतिक्रमण हटाओ अभियान से 133 परिवार बेघर हुए हैं, जिससे स्थानीय नेताओं के वोट समीकरण बिगड़ सकते हैं।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जासं, रामनगर। पुछड़ी नई बस्ती क्षेत्र में दो चरणों की अतिक्रमण हटाओ की कार्रवाई चुनाव भी प्रभावित कर सकती है। दरअसल यहां से जितने लोग बेघर हुए हैं, अब वह अन्यत्र चले जाएंगे। इससे चुनाव लड़ने वाले नेताओं के वोट पर भी इसका कुछ असर पड़ सकता है।
पुछड़ी नई बस्ती में दो चरणों की कार्रवाई में 133 परिवारों को हटाया गया है। पिछले वर्ष पहले चरण में 52 व शनिवार को हुई कार्रवाई में 81 लोगों के मकान ध्वस्त किए गए।
बेघर होने के बाद ऐसे में अब यह परिवार अन्यत्र शिफ्ट होंगे। जिससे यहां आने वाले समय में वोट लेने वाले नेताओं पर इसका असर देखने को मिलेगा। नेताओं के वोट का समीकरण भी बिगड़ सकता है। एक परिवार में यदि चार सदस्य भी वोट देने वाले होंगे तो पांच सौ से अधिक वोट का असर चुनाव में पड़ेगा।
वर्षों का अतिक्रमण छह घंटे में जमींदाेज
रामनगर: पुछड़ी गांव में जंगल की सरकारी जमीन पर कई वर्षों से पक्का अतिक्रमण कर भवन बना लिए गए थे। लेकिन शनिवार को हुई कार्रवाई में जब एक साथ अलग-अलग जगह पर 28 बुलडोजर गरजे तो अतिक्रमण छह घंटे में ही जमींदोज हो गया। कल तक खड़े भवन मलबे में तब्दील हो गए।
चारों ओर जहां भी नजर गई हर जगह भवनों का बस मलबा ही पड़ा नजर आया।
जमीन लेने से पहले तहसील या पटवारी से खंगाल लें दस्तावेज
सबसे पहले जो भी उस जमीन को खरीद रहा है, उसे उस जमीन से संबंधित दस्तावेज का तहसील व पटवारी से सत्यापन कराना चााहिए। जो बेच रहा है, उसे भी पूरी सूचना देनी चाहिए कि कौन सा खसरा नंबर है, जमीन का वर्ग व स्टेटस क्या है। तहसील या वन विभाग को भी इस संबंध में जागरूकता के लिए बोर्ड लगाकर बताना चाहिए कि कौन सी जगह में जमीन नहीं खरीदी जा सकती है। - एमएस नेगी, आर्किटेक्ट, रामनगर
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