50 साल से पेड़ों को बचा रहे पीपल बाबा, 21 राज्यों में लगाए 1.5 करोड़ से ज्यादा पौधे
पीपल बाबा, स्वामी प्रेम परिवर्तन, पिछले 50 वर्षों से पीपल के पेड़ों के संरक्षण और रोपण का कार्य कर रहे ...और पढ़ें

पीपल बाबा के रूप में प्रसिद्ध स्वामी प्रेम।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। पीपल बाबा के रूप में प्रसिद्ध स्वामी प्रेम परिवर्तन के अनुसार वह पिछले 50 वर्षों से पीपल के पेड़ों के संरक्षण और रोपण का कार्य कर रहे हैं।
अब तक उन्होंने 21 राज्यों के 226 जिलों में लगभग 1.5 करोड़ पीपल के पौधे लगाए हैं, जिनमें से एक करोड़ 27 लाख पौधे जीवित और सत्यापित हैं। इसलिए पब्लिक ने उनको पीपल बाबा नाम दिया है। बोले उत्तराखंड के नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में भी गैर सरकारी संगठनों के साथ पीपल के पौधे लगाने का अभियान शुरू कर रहे हैं।
पीपल है महाराज वृक्ष
उन्होंने कहा कि पीपल को महाराज वृक्ष कहा जाता है। जिस प्रकार बाघ या हाथी के हिलने से पूरा जंगल प्रभावित होता है, उसी प्रकार पीपल एक मुख्य वृक्ष है। पीपल के पेड़ लगाने से न केवल पर्यावरण और इकोसिस्टम बेहतर होता है, बल्कि इसके संरक्षण से 140 प्रकार के पक्षी, गिलहरियां और कई प्रकार के कीट, पॉलिनेटर (परागणकर्ता) व फल खाने वाली मक्खियां भी पनपती हैं।
शुक्रवार को हिमालयन इकोज में पहुंचे पीपल बाबा ने दैनिक जागरण से बातचीत करते हुए कहा कि पहाड़ों और अन्य जगहों पर पीपल से जुड़ी कई भ्रांतियां और कहानियां प्रचलित हैं कि इसे नहीं लगाना चाहिए या यह भूतिया पेड़ है, लेकिन पिछले 50 वर्षों से इस सोच को बदलते हुए बड़े पैमाने पर पीपल और अन्य 160 प्रकार के पौधे लगाने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने माना कि पहाड़ी इलाकों में पीपल के पेड़ों की संख्या कम हो गई है, इसके पीछे गलत मान्यताएं भी हैं। पीपल जलवायु परिवर्तन का भी सूचक है। दक्षिण के राज्यों में पीपल का पत्ता बड़ा जबकि पहाड़ों में छोटा होता है।
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