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जिंदगी की भागदौड़ से थक जाएं तो नीम, पीपल व आंवला के पास आएं... बड़े काम की है Forest Therapy

By Sarvendra Pundir Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 04 Oct 2026 05:10 PM (IST)

भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव कम करने के लिए पेड़ अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर मेरठ के गांधी बाग और ...और पढ़ें

गांधी बाग में औषधीय पेड़ों के बीच में पार्क में योगाभ्यास करते आमजन। जागरण

गांधी बाग में औषधीय पेड़ों के बीच में पार्क में योगाभ्यास करते आमजन। जागरण 

HighLights

  1. नीम, पीपल, आंवला जैसे पेड़ तनाव कम करने में सहायक।

  2. पेड़ों से निकलने वाले यौगिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

जागरण संवाददाता, मेरठ। भागदौड़ भरी जिंदगी में लगातार बढ़ते तनाव को कम करने में पेड़ अहम भूमिका निभाते हैं। वन विभाग की प्रशिक्षण विंग के अधिकारियों के अनुसार मेरठ के गांधी बाग और संजय वन में ऐसे पेड़ मौजूद हैं, जिनके बीच कुछ पल बिताने से तनाव कम होता है। इन पेड़ों द्वारा छोड़े जाने वाले यौगिकों के संपर्क में रहने से इंसानी शरीर तनाव वाले हार्मोन एड्रेनालाइन और कोर्टिसोल को कम करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता (एनके सेल) बढ़ती है।

वन विभाग की प्रशिक्षण विंग और शोध विभाग प्रभारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि गांधी बाग और संजय वन में नीम, बरगद, पीपल, अशोक, आंवला, अर्जुन, सहजन आदि पेड़ बड़ी संख्या में है। इन पेड़ों के बीच कुछ देर तक रहने से तनाव कम होता है। पेड़ों के बीच टहलने के साथ साथ पक्षियों की आवाज सुनना भी कानों को सुकून देता है। प्रभागीय निदेशक वानिकी वंदना फोगाट के अनुसार, वन क्षेत्र केवल वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं। शहरों में मौजूद हरित क्षेत्र लोगों को प्रकृति के करीब आने का अवसर देते हैं।

गांधी बाग जैसे स्थानों पर कुछ समय शांत वातावरण में बिताना लोगों के लिए मानसिक रूप से सुकून देने वाला अनुभव देता है। वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय के अनुसार प्रकृति का लाभ उठाने के लिए किसी विशेष गतिविधि की जरूरत नहीं है। व्यक्ति कुछ देर धीरे-धीरे टहल सकता है। पेड़ों और पक्षियों को देख सकता है। सामान्य गति से अधिक गहरी सांस ले सकता है। इससे तनाव कम होता है।

इस बार वन विभाग आठ अक्टूबर को वन्य जीव सप्ताह कार्यक्रम करने जा रहा है। लोगों को जागरूक करने से ऐसी जगह तलाशी जा रही, जहां औषधीय पौधे हों और जनता को इसके बारे में सोदाहरण बताया जा सके। इसकी खातिर गांधी बाग, संजय वन में से एक का चयन होना है।

जापान की फोरेस्ट थेरेपी के बाद हुए 25 अध्ययन
प्रशिक्षण और शोध विंग के प्रभारी संजय कुमार ने बताया कि जापान की फोरेस्ट थेरेपी के बाद मुख्य राज्य वन अनुसंधान संस्थान कानपुर ने 25 अध्ययन किए। इसमें पाया कि पेड़ तनाव को कम करने या पूरी तरह समाप्त करने में सहायक है।

खुशी मिलती है, तनाव कम होता है
शरीर में डोपामाइन, सेरोटोनिन, आक्सीटोनिन, एड्रेनालिन हार्मोन होते हैं। डोपामिन हार्मोन बढ़ने से सकारात्मक विचार आते हैं। तनावमुक्त होते हैं। सेरोटोनिन इमोशन जबकि एड्रेनालिन जोश बढ़ाता है। आक्सीटोनिन सोशल एक्टिविटी बढ़ाता है। पेड़ों के बीच में जाने से यह सब घटते-बढ़ते हैं। शरीर में सिंपेथिक और पैरासिंपेथिक दो सिस्टम होते हैं। नीम, पीपल, आंवला, बरगद, अशोक, अर्जुन ऐसे पेड़ हैं, जो पैरासिंपेथिक को बढ़ाते हैं और खुशी मिलती है। तनाव कम होता है। इन पेड़ों से माइनिन और लीमोनिन केमिकल रिलीज होता है, जो खुशी महसूस कराता हैं।
डा. वीरोत्तम तोमर, सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ